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आज असम की दो दिवसीय यात्रा पर प्रधानमंत्री मोदी, 11,600 करोड़ रुपये की देंगे सौगात

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर गुवाहाटी पहुंचे। आज पीएम मोदी लगभग 11,600 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल दो दिवसीय यात्रा पर गुवाहाटी पहुंचे हैं। अपनी यात्रा के दौरान कल शाम पीएम ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की असम इकाई की कोर कमेटी से मुलाकात की और आज लगभग 11,600 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री कल शाम करीब 6.30 बजे ओडिशा से गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे और कोइनाधारा राज्य अतिथि गृह के लिए रवाना हुए। इस दौरान राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, सीएम हिमंत विश्व शर्मा, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, कुछ राज्य मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने मोदी का स्वागत किया। 

राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के बाद राज्यपाल कटारिया ने X पर एक पोस्ट में कहा, “हमारे सुंदर राज्य असम में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का स्वागत करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं।” मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने असम में मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता, देश के विकास का ध्वजवाहक और असम तथा पूर्वोत्तर का सच्चा हितैषी बताया। उन्होंने कहा, “असम में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आगमन का जश्न मनाते हुए, 1,00,000 दीये जलाने के लिए खानापारा में हजारों लोग एकत्र हुए।” वहीं केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि असम के लोग राज्य और पूर्वोत्तर भारत के लिए बड़े विकास कार्यों की पूर्व संध्या पर मोदी के मार्गदर्शन का उत्साहपूर्वक इंतजार कर रहे हैं। 

11.30 बजे करेंगे जनसभा को संबोधित

सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा था कि प्रधानमंत्री रात में भाजपा की राज्य कोर कमेटी से मुलाकात करेंगे और पार्टी मामलों पर चर्चा करेंगे। मोदी रविवार को 11.30 बजे खानापारा के वेटरनरी कॉलेज खेल के मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां से कई राज्य और केंद्रीय परियोजनाओं का अनावरण किया जाएगा। 

ये सौगात देंगे प्रधानमंत्री मोदी

बता दें कि जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला आज पीएम मोदी रखेंगे उनमें कामाख्या मंदिर गलियारा (498 करोड़ रुपये), गुवाहाटी में नए हवाई अड्डे के टर्मिनल से 6 लेन की सड़क (358 करोड़ रुपये), नेहरू स्टेडियम को फीफा मानकों के अनुरूप बनाना (831 करोड़ रुपये) और चंद्रपुर में एक नया खेल परिसर (300 करोड़ रुपये) स्थापित करना शामिल है।

16 साल बाद OTT से वापसी करेंगी उर्मिला मातोंडकर:एक गलती से बर्बाद हुआ था करियर, ‘रंगीला’ के बाद हीरो से ज्यादा फीस लेती थीं

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बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर आज 50 साल की हो गई हैं। उर्मिला का नाम 90 के दशक की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल किया जाता था। इन्होंने जुदाई, रंगीला, सत्या, भूत, कौन जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। इनका नाम उस दौर की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेसेस में लिया जाता था। कई बार तो इन्हें हीरो से भी ज्यादा फीस मिलती थी।

टॉप पर रहने के बावजूद उर्मिला की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया। धीरे-धीरे उर्मिला का करियर डाउनफॉल पर चला गया। दरअसल, इसके पीछे उर्मिला की एक जिद थी जो कि बाद में उन पर ही भारी पड़ गई।

2019 में उन्होंने पॉलिटिक्स में भी किस्मत आजमाई, लेकिन इसमें भी बात नहीं बनी। बतौर लीडिंग एक्ट्रेस उर्मिला की आखिरी फिल्म ‘ईएमआई’ 2008 में रिलीज हुई थी। इसके बाद इन्होंने फिल्मों में छोटे- मोटे कैमियो किए, लेकिन बतौर हीरोइन इन्हें कोई फिल्म नहीं मिली।

अब 16 साल बाद उर्मिला को ओटीटी के जरिए एक्टिंग में कमबैक करने का मौका मिला है। वो 2024 में वेबसीरीज तिवारी में नजर आएंगीं।

आइए, नजर डालते हैं उर्मिला की लाइफ से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स पर…

आर्थिक तंगी के कारण बचपन में नहीं मनाया बर्थ डे

उर्मिला का जन्म 4 फरवरी,1974 को मुंबई में श्रीकांत और सुनीता मातोंडकर के घर हुआ था। उर्मिला मिडिल क्लास फैमिली से हैं। जब वो छोटी थीं तो उन्होंने कभी अपना जन्मदिन सेलिब्रेट नहीं किया क्योंकि माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं हुआ करते थे कि वो बेटी का जन्मदिन मना पाएं।

इस बात का जिक्र उर्मिला ने खुद एक इंटरव्यू में किया था और कहा था, बचपन में कम पैसे होने के बावजूद मेरे पेरेंट्स हमेशा मुझे सारी सुख-सुविधाएं देने की कोशिश करते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से मैंने और मेरे भाई ने कभी बचपन में अपना बर्थ डे सेलिब्रेट नहीं किया। सेलिब्रेशन के बजाय मेरे पेरेंट्स ने मुझे सिखाया कि मैं इस दिन जरूरतमंदों को कुछ दान दे दूं। इतनी अच्छी फैमिली में पैदा होने का मुझे हमेशा गर्व रहेगा।

उर्मिला की स्कूलिंग मुंबई में ही पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई के डीजी रुपारेल कॉलेज से आगे की पढ़ाई की थी। उर्मिला जब छोटी थीं, उस समय वे अपने बाबा के साथ थिएटर देखने जाती थीं। यहीं से उन्हें एक्टिंग में दिलचस्पी हो गई थी।

17 साल में बनी थीं कमल हासन की हीरोइन

बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करने के बाद उर्मिला को हीरोइन के तौर पर मलयालम फिल्म चाणक्यन में लीड एक्ट्रेस के तौर पर काम करने का मौका मिला। उस वक्त उनकी उम्र 17 साल थी। इसके बाद उन्होंने फिल्म नरसिम्हा से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया। इस फिल्म के डायरेक्टर एन चंद्रा थे जो कि बाद में उर्मिला से बेहद नाराज हो गए थे।

एक इंटरव्यू में चंद्रा ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते हुए कहा था कि उर्मिला को बॉलीवुड में उन्होंने ही ब्रेक दिया था। इसके बावजूद उर्मिला ने उनका जिक्र कहीं नहीं किया और न ही उनकी शुक्रगुजार रहीं।

उर्मिला ने चंद्रा की नाराजगी को दूर करते हुए फिर उनसे माफी मांगी थी और कहा था कि वो उनकी हमेशा एहसानमंद रहेंगी और वो न उन्हें कभी भूली हैं और न ही उन्हें भूल सकती हैं।

जब शाहरुख को लात मारने में डर गईं उर्मिला

दूसरी ही फिल्म ‘चमत्कार’ में उर्मिला शाहरुख खान की हीरोइन बनी नजर आई थीं। इस फिल्म में काम करने के दौरान दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री में काफी नए थे। दीवाना के बाद शाहरुख की ये दूसरी फिल्म थी और उर्मिला की भी ये दूसरी फिल्म थी। फिल्म में काम करने के दौरान उर्मिला काफी नर्वस थीं। फिल्म के गाने ‘बिच्छू ओ बिच्छू’ को फिल्माने में तो उर्मिला के पसीने छूट गए थे क्योंकि एक सीन में उन्हें शाहरख को लात मारनी थी।

उर्मिला ने एक इंटरव्यू में कहा था, मैं उस सीन को शूट करने में काफी डर गई थी क्योंकि मैं गाने की शूटिंग में महज दो मिनट पहले ही शाहरुख से मिली थी। कई रीटेक्स के बावजूद मैं उन्हें लात नहीं मार पा रही थी। मैं फ्रेम में आती थी और फिर पैनिक हो जाती थी। बाद में मेरी हालत देख शाहरुख ने खुद मुझसे कहा था, कोई बात नहीं उर्मिला, मुझे कोई दिक्कत नहीं तुम मुझे किक कर सकती हो। उनके ऐसा कहने के बाद मैंने उन्हें जोर से लात मारी और शॉट ओके हो गया।

‘रंगीला’ ने रातोंरात दिलाया स्टारडम

उर्मिला को फिल्म ‘आ गले लग जा’ में भी काफी पसंद किया गया था लेकिन उर्मिला को असली सफलता 1995 में आई फिल्म ‘रंगीला’ से मिली। इस म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म में उर्मिला ने उभरती हुई एक्ट्रेस मिली का किरदार निभाया था जिसमें आमिर खान और जैकी श्रॉफ उनके अपोजिट थे।

फिल्म इतनी सक्सेसफुल रही कि उर्मिला रातोंरात स्टार बन गईं। फिल्म के डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा थे। 41वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में रंगीला को 12 अवॉर्ड कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। इसमें से एक कैटेगरी बेस्ट एक्ट्रेस की थी जिसमें उर्मिला भी नॉमिनेट हुई थीं।

इस फिल्म को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे। जैकी श्रॉफ को बेस्ट सपोर्टिंग रोल, अहमद खान को बेस्ट कोरियोग्राफी, मनीष मल्होत्रा को कॉस्टयूम डिजाइनिंग, राम गोपाल को बेस्ट स्टोरी और ए.आर. रहमान व आर. डी. बर्मन को बेस्ट म्यूजिक के लिए ये अवॉर्ड मिले। आशा भोसले को गाने तन्हा-तन्हा के लिए स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला था।

जूही, करिश्मा ने ठुकराई ‘जुदाई’, उर्मिला को हुआ फायदा

फिल्म जुदाई 1 फरवरी, 1997 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उर्मिला, श्रीदेवी और अनिल कपूर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म हिट रही थी लेकिन इस फिल्म में उर्मिला ने जो जाह्नवी साहनी का किरदार निभाया था, उसके लिए वो पहली पसंद नहीं थीं। उर्मिला से पहले ये रोल जूही चावला और करिश्मा कपूर को ऑफर किया गया था लेकिन दोनों ने इससे इंकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों एक्ट्रेसेस श्रीदेवी के साथ सेकंड लीड एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थीं इसलिए उन्होंने ये रोल ठुकरा दिया था। उनके ठुकराने के बाद ये रोल उर्मिला को मिला और उन्हें इस रोल के लिए काफी तारीफें भी मिलीं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस केटेगरी में नॉमिनेशन भी मिला था।

1999 में रिलीज हुई 6 फिल्में, मिलती थी हीरो से ज्यादा फीस

रंगीला के हिट होने के बाद उर्मिला के पास फिल्मों की लाइन लग गई थी। यही वजह थी कि 1999 में उनकी 6 फिल्में रिलीज हुई थीं, जिनमें जानम समझा करो, हम तुमपे मरते हैं, दिल्लगी, सत्या, मस्त, कौन और खूबसूरत शामिल हैं।

खुद उर्मिला ने बताया था कि अपने करियर के पीक पर उन्हें हीरो से ज्यादा फीस तक मिलने लग गई थी इसलिए उन्होंने कभी बॉलीवुड में जेंडर के आधार पर हीरोइनों को कम पैसे मिलने की बात नहीं की और न ही कभी इसका समर्थन किया।

रामगोपाल वर्मा की 13 फिल्मों में आईं नजर

फिल्म ‘रंगीला’ की शूटिंग के दौरान फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा उर्मिला को दिल दे बैठे थे। वर्मा अपनी हर फिल्म में सिर्फ उर्मिला को ही कास्ट करते थे। दोनों ने साथ में 13 फिल्में की थीं, जिनमें तेलुगू की अंथम, द्रोही, गायम, अंगनगा, ओका राजू और हिंदी की रंगीला, दौड़, सत्या, कौन, मस्त, जंगल, भूत और आग जैसी फिल्में शामिल हैं।

उर्मिला भी सिर्फ राम गोपाल वर्मा की फिल्में करने लगीं। यही गलती उनके बेहतरीन करियर पर भारी पड़ गई। उनके इस फैसले से कई डायरेक्टर नाराज हुए क्योंकि उर्मिला उनकी फिल्में लगातार ठुकराती जा रही थीं। देखते-ही-देखते फिल्ममेकर्स ने भी उर्मिला को फिल्में ऑफर करना बंद कर दिया। एक समय ऐसा आया जब रामू ने भी उर्मिला को लेकर फिल्में बनानी छोड़ दीं और उनके पास कोई काम नहीं बचा।

राम गोपाल वर्मा की वाइफ ने मारा था थप्पड़

उर्मिला को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने राम गोपाल वर्मा से कन्नी काटनी शुरू कर दी, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उर्मिला का करियर छोटी-मोटी फिल्मों तक ही सिमट कर रह गया था। उनकी पर्सनल लाइफ पर भी इसका बुरा असर पड़ा।

राम गोपाल वर्मा उर्मिला को बेहद चाहते थे, लेकिन उर्मिला ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ लिए। उर्मिला से अफेयर के चलते रामू की शादीशुदा जिंदगी भी बर्बाद हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बार किसी फिल्म के सेट पर पहुंचकर राम गोपाल वर्मा की पत्नी ने उर्मिला को थप्पड़ मार दिया था। इस बात से इतना हंगामा हुआ कि रामू ने फिर अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था।

फिल्मों में काम करने को तरस गईं उर्मिला

उर्मिला के लिए 2005 के बाद का समय डाउनफॉल वाला साबित हुआ था। वो ‘बस एक पल’ और ‘कर्ज’ जैसी फिल्मों में नजर आईं जो कि फ्लॉप साबित हुईं। इसके बाद उन्होंने कुछ मराठी और रीजनल फिल्मों में भी काम किया, लेकिन बात नहीं बनी। तब उर्मिला ने टेलीविजन पर कदम रखा। वो डांस रियलिटी शो झलक दिखला जा से बतौर सेलिब्रिटी जज जुड़ीं। इसके अलावा उन्होंने वार परिवार, चक धूम धूम जैसे शोज में भी जज की भूमिका निभाई।

अपने फिल्मी करियर पर उर्मिला ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘1991 में मेरे अलावा कुछ 16-17 नई लड़कियों ने बॉलीवुड में एंट्री ली थी और उनमें से कुछ आठ या नौ इंडस्ट्री से जुड़े किसी ना किसी व्यक्ति की बेटियां थीं। करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, पूजा भट्ट, काजोल उनमें से कुछ नाम हैं।’

‘रंगीला के पहले मेरे बारे में भी काफी कुछ अनाप-शनाप लिखा गया। मैंने ‘नरसिम्हा’ से काफी अच्छी शुरुआत की थी और लोगों ने मुझे पसंद किया था और डांस और एक्टिंग को लेकर मेरी तारीफ की थी, लेकिन मुझे लगता है क्योंकि इंडस्ट्री में मेरे पास ज्यादा सपोर्ट नहीं था और मैं एक बिल्कुल गैर फिल्मी पृष्ठभूमि वाली आउटसाइडर थी, तो मुझे कहीं ना कहीं यहां के नियम नहीं पता थे।’

‘मुझे ये नहीं पता था कि मीडिया को किस तरह से खुश रखना है। जो कि उस समय बहुत बड़ी बात थी। इस मामले में मैं नॉर्मल से बहुत नीचे थी। मेरे बारे में इतनी वाहियात बातें लिखी गई थीं कि वो ऐसे फेसेस बनाती है, वो ये है वो वो है, मुझे डिमोरलाइज करने का कोई भी मौका किसी ने भी नहीं गंवाया था। भले ही उस इंसान को अपनी जॉब आती हो या ना आती हो। इसमें उस वक्त की मीडिया के अलावा इंडस्ट्री के भी काफी लोग शामिल थे।’

उन्होंने कहा, ‘जिस समय मैं ‘रंगीला’ कर रही थी, उस समय मुझे इस तरह से नकार दिया गया था जैसा सिनेमा के इतिहास में कभी किसी के साथ नहीं हुआ होगा।’

9 साल छोटे बिजनेसमैन से शादी की, धर्म परिवर्तन के लगे आरोप

2016 में उर्मिला ने 9 साल छोटे बिजनेसमैन मोहसिन अख्तर मीर से शादी करके सबको चौंका दिया। मोहसिन एक मॉडल भी हैं जिन्होंने ‘लक बाय चांस’ जैसी फिल्म में काम किया था। उर्मिला महाराष्ट्रीयन हिंदू हैं जबकि मोहसिन मुस्लिम इसलिए शादी के बाद ये अफवाहें उड़ीं कि उर्मिला ने धर्म परिवर्तन कर लिया है और वो मुस्लिम बन गई हैं।

इस पर उर्मिला ने सफाई देते हुए कहा था, मेरे पति और उनकी फैमिली ने कभी मुझ पर धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं बनाया। हम दोनों अपने धर्म की इज्जत करते हैं। मैं हमेशा हिंदू रहूंगी, मैंने अपना धर्म नहीं बदला है, ये बहुत अजीब बात है कि लोग मुझे इसके लिए अक्सर ट्रोल करते हैं।

राजनीति में रहीं फेल

बॉलीवुड में काम न मिलता देख उर्मिला ने 2019 में राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने लोकसभा चुनाव के पहले राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने उत्तर मुंबई सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी गोपाल शेट्‌टी से हार गईं। इसके पांच महीने बाद ही उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

कांग्रेस छोड़ते वक्त उन्होंने कहा था, ‘मेरी राजनीतिक और सामाजिक समझ बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए है, लेकिन मुंबई कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी के कारण मैं ऐसा नहीं कर पा रही हूं।’ इसके कुछ समय बाद उर्मिला ने शिवसेना जॉइन कर ली थी।

16 साल बाद करेंगी कमबैक

बतौर लीडिंग एक्ट्रेस उर्मिला की आखिरी फिल्म ‘ईएमआई’ 2008 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के बाद उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे कैमियो किए थे, लेकिन बतौर हीरोइन उन्हें कोई फिल्म नहीं मिली। अब 16 साल बाद उर्मिला को ओटीटी के जरिए अपना एक्टिंग कमबैक करने का मौका मिला है। वो 2024 में वेबसीरीज तिवारी में नजर आएंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उर्मिला की यह सीरीज मां-बेटी के जज्बाती रिश्तों पर बनी है। फिल्म की कहानी छोटे कस्बे की है, जिसमें उर्मिला का एक्शन अवतार भी देखने को मिलेगा।

कश्मीर में सेना ने पेश की मानवता की मिशाल, गर्भवती महिला को पैदल स्ट्रेचर पर आठ किमी दूर अस्पताल पहुंचाया

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पूरे रास्ते में 2 से 3 फीट मोटी बर्फ की चादर बिछी हुई थी लेकिन सेना के जवानों ने हार नहीं मानी। गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और वहां से लगभग 7-8 किलोमीटर दूर रात के अंधेरे में अस्पताल पहुंचाया।

कुपवाड़ा: जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में इस समय जबरदस्त बर्फ़बारी हो रही है। बर्फबारी की वजह से सड़कों पर बर्फ जमी हुई है। रास्ते बंद हैं। इस वजह से स्थानीय लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सबसे ज्यादा समस्या मेडिकल इमरजेंसी वालों को हो रही है। लेकिन कहा जाता है कि जहां भारतीय सेना के जवान होते हैं, वहां हर समस्या का समाधान है। इसी की एक मिशाल कुपवाड़ा में देखने को मिली।

अचानक बिगड़ी महिला की तबियत 

दरअसल एक गर्भवती महिला की तबियत अचानक बिगाड़ गई। परिजनों ने नजदीकी अस्पताल में संपर्क किया लेकिन भारी बर्फ़बारी की वजह से अस्पताल कोई मदद करने में सक्षम नहीं था। इसके बाद परिजनों ने सेना से समरक किया। सेना ने मानवता की मिशाल पेश करते हुए मदद के लिए जवानों को भेज दिया। महिला को किसी भी गाड़ी की मदद से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सकता था। इसके बाद जवानों ने पैदल ही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की ठानी।

सड़क पर बिछी हुई थी बर्फ की चादर

पूरे रास्ते में 2 से 3 फीट मोटी बर्फ की चादर बिछी हुई थी लेकिन सेना के जवानों ने हार नहीं मानी। गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और वहां से लगभग 7-8 किलोमीटर दूर रात के अंधेरे में अस्पताल पहुंचाया। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान जवानों ने अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाया और महिला को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी

Kashmir Wakes Up To Fresh Snowfall, Temperature Drops Below Freezing Point

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Several parts of Kashmir, including Srinagar and Ganderbal, witnessed heavy snowfall, which the officials said was due to a western disturbance.

Srinagar: 

Kashmir was once again covered with a white blanket on Sunday after the Valley witnessed fresh snowfall overnight.

The mercury has dropped several degrees below freezing point in Kashmir.

On Saturday, the famous ski resort Gulmarg in north Kashmir reportedly recorded a low of minus 10.6 degrees Celsius, while Pahalgam in south Kashmir saw minus 8.3 degrees Celsius.

Officials said that the snow, which has affected the traffic throughout this week, was being cleared from roads.

Kashmir received season’s first snowfall this week 

Most parts of Kashmir, mainly the plains, received the season’s first snowfall this week as winter’s harshest period, Chillai Kalan, went snowless and registered one of the driest winter spells ever.

प्रिया दत्त बोलीं- कैंसर से डरना नहीं, लड़ना है:कहा- कैंसर का मतलब मौत नहीं, सही समय पर इलाज जरूरी, जागरूक होना सबसे अहम

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आज वर्ल्ड कैंसर डे (4 फरवरी) है। इस मौके पर दैनिक भास्कर ने पूर्व लोकसभा सांसद और सोशल वर्कर प्रिया दत्त से बात की। प्रिया दिवंगत एक्टर सुनील दत्त और नरगिस की बेटी हैं। 1981 में नरगिस की कैंसर से मौत के बाद सुनील दत्त ने नरगिस दत्त फाउंडेशन की शुरुआत की थी। यह फाउंडेशन कैंसर से पीड़ित मरीजों की मदद और उन्हें अच्छी चिकित्सा मुहैया कराने की सोच से शुरू किया गया था।

सुनील दत्त के निधन के बाद प्रिया दत्त ने इस फाउंडेशन को आगे बढ़ाया। आज इस फाउंडेशन के जरिए हजारों कैंसर पेशेंट की मदद की जा चुकी है। प्रिया ने कहा कि हमें कैंसर से डरना नहीं बल्कि लड़ना है। लोग कैंसर का नाम सुनकर ही डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि कैंसर का मतलब मौत ही है। ऐसा नहीं है, अगर सही समय पर इसका इलाज हो जाए तो इससे बचा जा सकता है।

जिनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, हमारा फाउंडेशन उन्हीं के लिए काम करता है
प्रिया दत्त ने कहा, ‘कैंसर के लिए अवेयरनेस फैलाने के लिए हमने 1981 में नरगिस दत्त फाउंडेशन की शुरुआत की थी। उस वक्त तक ज्यादातर लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं था। हालांकि उस वक्त इसके पेशेंट भी कम हुआ करते थे। आज यह संख्या काफी बढ़ गई है, लेकिन एक बात अच्छी है कि लोग अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक हो गए हैं।

कैंसर से डरने की जरूरत नहीं, बस जागरूकता होनी चाहिए
प्रिया ने कहा कि लोगों को कैंसर का नाम सुनकर डरने की जरूरत नहीं है। कैंसर की तुलना में अभी भी हार्ट अटैक से ज्यादा लोग मरते हैं। लोगों को लगता है कि कैंसर का मतलब मौत है। ऐसा नहीं है, अगर सही समय में बीमारी का पता चल जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। हमें बस जागरूकता दिखानी है।

अगर बॉडी में कुछ भी परेशानी दिखे, उसकी तुरंत जांच करानी चाहिए। मुंह में भी कुछ हुआ तो उसे छाला समझ कर इग्नोर मत कीजिए। हमें कैंसर से डरना नहीं बल्कि लड़ना है। हमें समय-समय पर टेस्ट कराते रहना चाहिए। अगर बीमारी को जल्दी डिटेक्ट कर लिया तो इसका ट्रीटमेंट भी आसान और सस्ता हो जाता है।

कोई मरीज पैसे के अभाव में अपनी जान न गंवाए, यही फाउंडेशन का लक्ष्य
प्रिया दत्त ने कहा कि उनका ऑर्गेनाइजेशन मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के साथ मिलकर काम करता है। नरगिस दत्त फाउंडेशन मरीजों को वहां भेजती है। उनके लिए फंड्स इकट्ठा करती है। पेशेंट्स की काउंसलिंग भी करती है।

साधारण से साधारण व्यक्ति भी फाउंडेशन तक पहुंच सकता है
अगर किसी छोटे शहर के व्यक्ति को आपके फाउंडेशन तक पहुंचना हो तो क्या करना पड़ेगा। जवाब में उन्होंने कहा, ‘हमारी वेबसाइट है। वहां फोन नंबर्स भी दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी हमारा प्रेजेंस है। जब आप गूगल पर नरगिस दत्त फाउंडेशन टाइप करेंगे तो सारी जानकारियां मिल जाएंगी।

जब भी हमारे पास किसी मरीज का फोन आता है, सबसे पहले हम उसका रिकॉर्ड देखते हैं। फिर उसे डॉक्टर्स को दिखाते हैं। सारी रिपोर्ट्स को देखने के बाद डॉक्टर्स मिलने का समय देते हैं।

फिर हमारे यहां से मरीजों को कॉल जाती है और उन्हें मुंबई बुलाया जाता है। हम कोशिश करते हैं कि कोई भी मरीज हमारे यहां से निराश न लौटे। अगर वो हमारी क्राइटेरिया में फिट नहीं भी बैठा तो भी हम उसके लिए किसी न किसी तरीके से दूसरी व्यवस्था जरूर करते हैं।’

डोनेशन का 85% पैसा मरीजों में लगता है
प्रिया ने कहा कि उनकी 15 लोगों की टीम है। सबको अलग-अलग काम दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारी छोटी सी टीम है। सबको पता है कि उन्हें क्या करना है। हमारी रोज मीटिंग्स होती हैं। हम रोज इस बात पर चर्चा करते हैं कि आज कितने मरीजों ने हमसे संपर्क करने की कोशिश की है।

पहले हमारे पास डोनेशन से जितने भी रुपए आते थे, वो हम सारे मरीजों के इलाज में लगा देते थे। अभी हम उसमें से 15% रख लेते हैं। डोनेशन का 85% पैसा मरीजों में लगता है। ऑफिस और स्टाफ के खर्चे भी तो निकालने पड़ते हैं। पहले इसे मैं अपने खर्चे से मैनेज करती थी, अब चूंकि टीम बड़ी हो गई है, काम भी बढ़ गया है। इसलिए अलग से पैसे लगने स्वाभाविक हैं।’

प्रिया ने कहा- खुद को मजबूत बनाना पड़ता है
आप अपने सामने रोज कैंसर के मरीजों को देखती हैं, उनके दुख और दर्द को फेस कैसे करती हैं। जवाब में प्रिया ने कहा, ‘अपने आप को थोड़ा मजबूत तो बनाना ही पड़ता है। मैं 13 साल की थी, जब मेरी मां नरगिस दत्त को कैंसर हुआ था। एक साल तक वो बहुत दर्द में रहीं। मैंने वो चीज झेली है। वहीं से मेरे अंदर हिम्मत आई।’

नरगिस ने जाते-जाते अपनी बातों से फाउंडेशन की नींव रख दी थी
नरगिस दत्त फाउंडेशन स्टार्ट करने की सोच कहां से आई? प्रिया ने कहा, ‘पिता सुनील दत्त मां का इलाज कराने अमेरिका ले गए थे। उस बीमारी की हालत में भी मां ने कहा कि आप मुझे तो यहां तक ले आए, लेकिन जरा उनके बारे में सोचिए जो इतना महंगा ट्रीटमेंट अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। मां की उन्हीं बातों ने नरगिस दत्त फाउंडेशन की नींव रख दी थी।

पिताजी ने अमेरिका में इस फाउंडेशन की शुरुआत की। वहां के लोगों ने उनकी काफी मदद की। पिताजी जब तक जीवित थे, तब तक इस फाउंडेशन को खुद के पैसे से चलाते रहे। वो किसी से फंड मांगने में हिचकिचाते थे। उनके निधन के बाद मैंने इसका चार्ज लिया। फाउंडेशन को बहुत बड़े लेवल पर आगे ले जाना था, इसलिए मैंने फंड इकट्ठा करना शुरू किया।’

अगर उस वक्त आज के जैसी एडवांस सुविधाएं होतीं तो क्या नरगिस जी को बचाया जा सकता था? जवाब में प्रिया दत्त ने कहा, ‘मां को पैंक्रियाटिक कैंसर था, जो आज भी बहुत खतरनाक है। हालांकि वो फाइटर थीं, हम कह सकते हैं कि आज के समय में ऐसा हुआ होता तो वो सर्वाइव कर सकती थीं।’

मां की तबीयत की वजह से फैमिली ने झेली कठिनाइयां
प्रिया ने कहा कि मां की तबीयत की वजह से उनकी एक साल की पढ़ाई बाधित हो गई थी। पूरा दत्त परिवार नरगिस जी के इलाज के लिए अमेरिका शिफ्ट हो गया था। प्रिया कहती हैं, ‘मैं, संजू और मेरी बहन, हम सभी उस वक्त ज्यादा समझदार नहीं हुए थे। पिताजी भी बहुत टूट चुके थे। हम लोग उन्हें भी संभालने में लगे थे।

मजबूरी ऐसी थी कि हम लोग खाना बनाना भी सीख गए थे। पिताजी ने तो खाना-पीना सब कुछ छोड़ दिया था। हम सोचते थे कि शायद हम लोग उनके लिए कुछ बनाएं तो वो खा सकते हैं।

पिताजी को लगता था कि वो अकेले हम लोगों को कैसे संभालेंगे। उस वक्त तक मां ही थीं, जो घर-द्वार से लेकर बच्चों तक पर सारा ध्यान देती थीं। पिताजी की लाइफ काफी ज्यादा व्यस्त रहती थी। हालांकि समय के साथ पिताजी को एहसास हुआ कि अब अपने बच्चों के लिए मां और बाप दोनों वही हैं। वो फिर से एक्टिव हुए और अपने बच्चों के लिए जीने लगे।’

मां-बाप ने साधारण तरीके से परवरिश की
प्रिया के मुताबिक, उनके माता-पिता ने कभी यह महसूस नहीं कराया कि हम कितने बड़े स्टार्स के बच्चे हैं। उन लोगों ने बहुत साधारण तरीके से हमारी परवरिश की। प्रिया ने कहा, ‘पिताजी काफी स्ट्रिक्ट थे। वे इस बात पर हमेशा जोर देते थे कि लाइफ में कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती है, इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। पिताजी कभी अपनी जड़ों को नहीं भूलते थे।’

28 वर्षीय भारतीय मूल के शख्य की न्यूजीलैंड में मौत, मामले की जांच में जुटी पुलिस

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गुरजीत सिंह एक कोरस टेक्नीशियन था जो लिबर्टन की हिलेरी सेंट में एक घर किराए पर ले रहा था.

नई दिल्ली: 

न्यूजीलैंड के डुनेडिन में 28 वर्षीय भारतीय मूल के एक व्यक्ति की रविवार को रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई. न्यूजीलैंड हेराल्ड के मुताबिक गुरजीत सिंह 2015 से ही न्यूजीलैंड में रह रहा था और सोमवार को उसका शव उसके घर के बाहर खून से लथपथ मिला. सोमवार की सुबह गुरजीत सिंह के एक दोस्त ने उसके शव को सबसे पहले देखा था, जो वहां गुरजीत का हालचाल पूछने के लिए पहुंचा था. शुरुआत में पुलिस गुरजीत की हत्या के कारण को नहीं समझ पाई थी लेकिन पोस्टपार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसे किसी नुकीली चीज से मारा गया है. इसके बाद पुलिस ने पुष्टी की कि उसकी मौत एक हत्या थी. 

गुरजीत सिंह एक कोरस टेक्नीशियन था जो लिबर्टन की हिलेरी सेंट में एक घर किराए पर ले रहा था. दरअसल, गुजरीत ने 6 महीने पहले ही शादी की थी और उसकी पत्नी इसी महीने न्यूजीलैंड आने वाली थी. आउटलेट की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरजीत की पत्नी की 6 फरवरी की फ्लाइट शेड्यूल है. गुरजीत का शव सोमवार सुबह तब मिला जब उसकी पत्नी ने उसके एक दोस्त को फोन किया और बताया कि वो गुरजीत से संपर्क नहीं कर पा रही है. 

न्यूजीलैंड पुलिस ने कहा कि उन्होंने गुरजीत की मौत की जांच के लिए एक बड़ी टीम तैनात की है. डिटेक्टिव सार्जेंट कल्लम क्राउडिस ने कहा कि डुनेडिन स्थित जांचकर्ता और क्राइस्टचर्च स्थित ईएसआर साइंटिस्ट हिलेरी सेंट में घटनास्थल की जांच कर रहे हैं, जिसे गुरजीत सिंह किराए पर ले रहा था.

कनाडा को चुनाव से पहले सता रहा ये डर, भारत-चीन को बताया ‘विदेशी खतरा’

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ताजा रिपोर्ट ‘ब्रीफिंग टू द मिनिस्टर ऑफ डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस ऑन फॉरेन इंटरफेरेंस’ में चीन को “अब तक का सबसे महत्वपूर्ण खतरा” बताया गया है. दस्तावेज़ में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का जिक्र करते हुए कहा गया है, “हम जानते हैं कि पीआरसी ने 2019 और 2021 के संघीय चुनावों को गुप्त रूप से प्रभावित करने की कोशिश की थी.” मीडिया ने कहा कि दस्तावेज़ के कुछ हिस्सों में केवल भारत और चीन का नाम सार्वजनिक किया गया है, जबकि इसका अधिकांश भाग काला कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि विदेशी हस्तक्षेप “संप्रभुता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मूल्यों को नष्ट करके” कनाडा और कनाडाई लोगों को नुकसान पहुंचाता है.

SBI के तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित:Q3 में बैंक का नेट प्रॉफिट 35% घटकर ₹9,163 करोड़ रहा, नेट इंटरेस्ट इनकम ₹39,815 करोड़ रही

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने आज शनिवार (3 फरवरी) को वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। Q3FY24 में बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार (YoY) पर 35% घटकर 9,163 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14,205 करोड़ रुपए था।

हालांकि, वित्त वर्ष 24 के पहले 9 महीनों में बैंक ने 40,378 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह वित्त वर्ष 23 के पहले 9 महीनों के 33,538 करोड़ रुपए के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट से 20.40% ज्यादा है।

तीसरी तिमाही में बैंक की इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार (YoY) पर 22% बढ़कर 105,733.78 करोड़ रुपए रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 86,616.04 करोड़ रुपए रही थी।

नेट इंटरेस्ट इनकम 39,815 करोड़ रुपए रही
बैंक ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 66,918 करोड़ रुपए का इंटरेस्ट का पेमेंट किया है। Q3 में देश के सबसे बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 39,815 करोड़ रुपए रही।

वित्त वर्ष 24 के पहले 9 महीनों में बैंक का NIM सालाना आधार पर 1 बीपीएस घटकर 3.28% हो गया। वहीं बैंक का डोमेस्टिक NIM वित्त वर्ष 24 के पहले 9 महीनों में सालाना आधार पर 8 बीपीएस घटकर 3.41% रहा।

ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स 2.42% रहा
बैंक का ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) 2.42% रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 3.14% था। दूसरी ओर, दिसंबर तिमाही के लिए नेट NPA पिछले साल के 0.77% की तुलना में 0.64% रहा।

फ्रांस में एफिल टावर पर लॉन्च हुआ भारत का UPI:मोदी बोले- देखकर खुशी हुई; जयपुर में इससे मैक्रों-मोदी ने किया था डिजिटल पेमेंट

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फ्रांस में शुक्रवार को UPI लॉन्च हो गया है। फ्रांस में भारतीय दूतावास ने 2 फरवरी को पेरिस के एफिल टावर पर यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। अब लोग UPI के जरिए एफिल टावर के लिए टिकट बुक कर सकेंगे।

इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- यह देखकर बहुत अच्छा लगा। खुशी हुई। यह UPI को ग्लोबल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

मैक्रों की भारत यात्रा के बाद हुई लॉन्चिंग
यह लॉन्चिंग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के बाद हुई है। 25 जनवरी को मैक्रों जयपुर पहुंचे थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें UPI पेमेंट डिजिटल सिस्टम के बारे में जानकारी दी थी। उन्हें पेमेंट करना सिखाया था। इसके अलावा दोनों लीडर्स ने चाय पी थी। इसका पेमेंट राष्ट्रपति मैक्रों ने किया था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति UPI पेमेंट के मुरीद हो गए थे। 26 जनवरी को मैक्रों ने स्टेट डिनर के दौरान कहा- ‘मैं जयपुर में PM मोदी के साथ पी गई चाय को कभी नहीं भूल सकता, क्योंकि उसका पेमेंट UPI से किया गया था। वो मेरे लिए बहुत खास था। वो चाय हमारी दोस्ती, गर्मजोशी, परंपरा और इनोवेशन का सबसे बेहतरीन उदाहरण था।’

फ्रांस और भारत के बीच डिजिटल पेमेंट को लेकर करार
जुलाई 2023 में फ्रांस के दौरे पर भारतीय समुदाय से बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- फ्रांस और भारत के बीच डिजिटल पेमेंट को लेकर करार हुआ है। इसके तहत फ्रांस में भारत के UPI से पेमेंट की जा सकेंगी। उन्होंने कहा था- जल्द फ्रांस में भारतीय पर्यटक रुपए में भुगतान कर सकेंगे।

NCPI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और फ्रांस की लाइरा कलेक्ट ने फ्रांस और यूरोप में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लागू करने के लिए एक समझौते पर साइन किए थे।

UPI 2016 में लॉन्च हुआ था
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI को 2016 में लॉन्च किया गया। इसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है। इसने आसान तरीके से सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा दी। इससे पहले डिजिटल वॉलेट का चलन था। वॉलेट में KYC जैसी झंझट है, जबकि UPI में ऐसा कुछ नहीं करना पड़ता।

UPI को NCPI ऑपरेट करता है
भारत में RTGS और NEFT पेमेंट सिस्टम का ऑपरेशन RBI के पास है। IMPS, RuPay, UPI जैसे सिस्टम को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऑपरेट करती है। सरकार ने 1 जनवरी 2020 से UPI ट्रांजैक्शन के लिए एक जीरो-चार्ज फ्रेमवर्क मैंडेटरी किया था।

पेरिस रेलवे स्‍टेशन पर चाकूबाजी में 3 लोग हुए घायल, आरोपी गिरफ्तार

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पेरिस के गारे डे ल्योन रेलवे स्टेशन पर चाकूबाजी की एक घटना में 3 लोग घायल हो गए हैं, जिसमें एक को गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस ने आरोपी शख्‍स को गिरफ्तार कर लिया है.

पेरिस: 

फ्रांस में पेरिस के गारे डे ल्योन रेलवे स्टेशन पर शनिवार को एक शख्‍स ने चाकू से कई लोगों पर हमला कर दिया. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस घटना में तीन लोग घायल हुए हैं. 

हिरासत में लिया गया व्यक्ति, जिसकी राष्ट्रीयता उजागर नहीं की गई है, सुबह लगभग 8:00 बजे (0700 GMT) स्टेशन पर छुरा लेकर पहुंचा और लोगों पर हमला करने लगा. इस स्‍टेशन पर घरेलू ट्रेनों के साथ-साथ स्विट्जरलैंड और इटली जाने वाली ट्रेनों की रुकती हैं. पुलिस ने कहा कि एक व्यक्ति को गंभीर चोटें आईं, जबकि दो अन्य मामूली रूप से घायल हुए हैं.

एक पुलिस सूत्र ने बताया, “संदिग्ध ने अपने हमले के दौरान (कोई भी धार्मिक नारा) नहीं लगाया. उसने पुलिस को एक इतालवी ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत किया.”