सरकार दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) में अपने कंट्रोलिंग स्टेक्स बेच सकती है। सरकार के पास फिलहाल SBI में 57.49% और ONGC में 58.89% की हिस्सेदारी है। टीवी18 ने इस बात की जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने से सरकार को कोई परहेज नहीं है, ना ही सरकार अपनी कंपनियों में माइनॉरिटी स्टेक्स रखने के खिलाफ है। किसी भी फर्म में 50% से कम की हिस्सेदारी माइनॉरिटी हिस्सेदारी होती है।
मार्केट में शेयर्स जारी कर प्राइवेट ओनरशिप बढ़ाएगी सरकार वित्त मंत्री ने बताया कि ‘दीपम’ यानी डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने धीरे-धीरे बड़ी मात्रा में सरकारी शेयरों को मार्केट में जारी किए हैं, ताकि प्राइवेट ओनरशिप को बढ़ाया जा सके। DIPAM डिसइन्वेस्टमेंट की प्रोसेस देखने वाला डिपार्टमेंट है।
कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ाना चाहती है सरकार वित्त मंत्री ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि कंपनियों की वैल्यूएशन बरकरार रहे। उन्होंने बताया कि पब्लिक सेक्टर की लिस्टेड कंपनियों और उनकी वैल्यूएशन में वाइब्रेंसी आई है। उनके शेयरों की कीमतें बढ़ी हैं, पहले की तुलना में डिविडेंड्स में बढ़ोतरी हुई है।
इसलिए डिसइन्वेस्टमेंट अलग बात है, लेकिन हम उन कंपनियों की वैल्यू बढ़ाने और मार्केट को उनके लिए फेवरेबल बनाने के लिए काम कर रहे हैं। बता दें कि सरकार पिछले कुछ सालों से पब्लिक लिस्टेड कंपनियों के डिसइन्वेस्टमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है। हाल ही में सरकार ने एअर इंडिया में अपने कंट्रोलिंग स्टेक्स टाटा ग्रुप को बेचे हैं।
तीसरी तिमाही में SBI को ₹9,163 करोड़ का प्रॉफिट Q3FY24 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का नेट प्रॉफिट सालाना आधार (YoY) पर 35% घटकर 9,163 करोड़ रुपए रहा है। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14,205 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष-24 के पहले 9 महीनों में बैंक ने 40,378 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।
तीसरी तिमाही में बैंक की इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार (YoY) पर 22% बढ़कर 105,733.78 करोड़ रुपए रही। बैंक ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 66,918 करोड़ रुपए इंटरेस्ट का पेमेंट किया है। Q3 में देश के सबसे बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 39,815 करोड़ रुपए रही।
नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के लिए कुल लगभग 18,000 उम्मीदवार दौड़ में शामिल हैं. जिन चार प्रांतीय विधानसभाओं में चुनाव होंगे उनमें पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान शामिल हैं.
इस्लामाबाद:
पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने आठ फरवरी को आम चुनाव कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के सभी निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए 26 करोड़ से अधिक मतपत्रों की छपाई भी शामिल है.
पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) के अनुसार, नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के लिए 12 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं और देशभर में 90,675 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जिनमें 41,403 संयुक्त मतदान केंद्र शामिल हैं. 25,320 मतदान केंद्र पुरुषों के लिए और 23,952 मतदान केंद्र महिला मतदाताओं के लिए हैं.
नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के लिए कुल लगभग 18,000 उम्मीदवार दौड़ में शामिल हैं. जिन चार प्रांतीय विधानसभाओं में चुनाव होंगे उनमें पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान शामिल हैं. नेशनल असेंबली (एनए) में कुल 336 सीट हैं जिनमें सामान्य वर्ग की 266 सीट, गैर-मुसलमान वर्ग की 10 सीट और महिला कोटे की 60 सीट शामिल हैं.
अरे राहुल भाई… पेटीएम से अपना सारा पैसा निकाल लो ये बंद होने वाला है। 29 फरवरी 2024 के बाद इसकी कई सारी सर्विस काम नहीं करेगी। क्या.. हां भाई सही बोल रहा हूं। RBI ने पेटीएम पेमेंट बैंक में पाई गई गड़बड़ियों के कारण उसकी सर्विसेस पर रोक लगा दी है।
ठीक है सोनू मैं जल्दी से पेटीएम वॉलेट से अपना सारा पैसा निकाल लेता हूं… पर क्या इसकी UPI सर्विस भी बंद हो जाएगी। और मेरी कार पर लगे फास्टैग का क्या होगा? मैंने तो म्यूचुअल फंड और गोल्ड में भी पेटीएम के जरिए ही इन्वेस्टमेंट किया है। एक FD भी है।
ठीक है राहुल मैं तुम्हें एक फाइनेंशियल एक्सपर्ट के पास ले चलता हूं। वो ही इन सभी सवालों का जवाब अच्छे से दे पाएंगे…
राहुल: क्या पेटीएम का ऐप काम करना बंद कर देगा, UPI भी नहीं होगा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: राहुल सबसे पहले मैं आपको कंपनी के बारे में 4 बातें बताता हूं ताकि आप इस पूरे मामले को अच्छे से समझ पाएं…
पेटीएम ब्रांड की पेरेंट कंपनी One97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड है।
इसका एक एसोसिएट बैंक भी है, पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड।
पेटीएम पेमेंट बैंक के जरिए पेटीएम ऐप पर सर्विसेज मिलती है।
पेटीएम पेमेंट बैंक में One97 कम्युनिकेशंस की 49% हिस्सेदारी है।
RBI ने जो रोक लगाई है वो पेटीएम पेमेंट बैंक पर लगाई है। पेटीएम अपनी कई सारी सर्विस इस बैंक के जरिए ही देता है। ऐसे में जो सर्विसेज पेटीएम पेमेंट्स बैंक के जरिए मिलती है वो 29 फरवरी 2024 के बाद बंद हो जाएंगी जबकि अन्य सर्विसेज पहले की तरह चलती रहेंगी।
पेटीएम अपनी UPI सर्विस पेटीएम पेमेंट बैंक के जरिए ही देता है। इसलिए दूसरे बैंकों के साथ टाई-अप नहीं होने की स्थिति में 29 फरवरी के बाद UPI सर्विस भी बंद हो जाएगी। पेटीएम ने बताया है कि उसकी NPCI और RBI दोनों के साथ इसे लेकर चर्चा चल रही है।
राहुल: सेविंग अकाउंट, वॉलेट, फास्टैग और NCMC अकाउंट का क्या होगा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट, फास्टैग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि में मौजूद पैसों के विड्रॉल या उपयोग पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। बैलेंस अवेलेबल होने तक इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
राहुल: क्या पेटीएम म्यूचुअल फंड और पेटीएम मनी स्टॉक अकाउंट सुरक्षित हैं? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: पेटीएम अपनी स्टॉक ब्रोकिंग और म्यूचुअल फंड सर्विसेज पेटीएम मनी के जरिए देता है। पेटीएम मनी एक सेबी रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट है। इसलिए सर्विसेज पूरी तरह से प्रभावित नहीं होंगी। अगर आप पैसों के क्रेडिट और डेबिट के लिए पेटीएम पेमेंट बैंक के अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं तो फिर आपकी सर्विसेज प्रभावित होंगी।
राहुल: मैंने तो पेटीएम से गोल्ड भी खरीदा है, क्या यह सुरक्षित हैं? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: गोल्ड इन्वेस्टमेंट MMTC-PAMP के जरिए पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए पेटीएम पेमेंट बैंक पर लिए गए RBI के एक्शन से ये सर्विस पूरी तरह से प्रभावित नहीं होगी। अगर आप पैसों के क्रेडिट और डेबिट के लिए पेटीएम पेमेंट बैंक के अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं तो फिर आपकी सर्विसेज प्रभावित होंगी।
राहुल: पेटीएम से लिए क्रेडिट कार्ड, लोन और इंश्योरेंस का क्या होगा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: पेटीएम जो क्रेडिट कार्ड प्रोवाइड करता है वो SBI और HDFC की पार्टनरशिप में करता है। इसी तरह लोन और इंश्योरेंस सर्विस भी पेटीएम पर दूसरे बैंक और NBFC के जरिए मिलती है। इसका पेटीएम पेमेंट बैंक से कोई-लेना देना नहीं है।
राहुल: तब तो पेटीएम के शेयर भी गिर गए होंगे क्या इन्हें खरीद लूं? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: ठीक कह रहे हो राहुल 2 दिनों में ही पेटीएम का शेयर 40% टूट गया है। शुक्रवार को इसमें 20% का लोअर सर्किट लगा और ये 487 रुपए पर आ गया। इससे पहले गुरुवार को भी इसमें लोअर सर्किट लगा था। अभी इन शेयरों को खरीदना सही फैसला नहीं होगा। जब तक इस मामले पर स्पष्टता नहीं आ जाती तब तक ऐसे शेयरों से दूर रहना चाहिए। पेटीएम के शेयर में इस गिरावट को देखते हुए सेबी ने इसकी सर्किट लिमिट अब 10% कर दी है।
राहुल: Paytm QR, साउंडबॉक्स, कार्ड मशीन बंद हो जाएंगी? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: पेटीएम के अनुसार उसका ऑफलाइन मर्चेंट पेमेंट नेटवर्क की ऑफरिंग्स जैसे कि पेटीएम क्यूआर, पेटीएम साउंडबॉक्स, पेटीएम कार्ड मशीन, हमेशा की तरह जारी रहेंगी।
राहुल: आखिर पेटीएम बैंक किन चीजों का उल्लंघन कर रहा था? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: मनीकंट्रोल के अनुसार RBI को पेटीएम की KYC में बड़ी अनियमितताएं मिली हैं, जिससे ग्राहक सीरियस रिस्क में आ गए थे। पेटीएम ने लाखों ग्राहकों की KYC नहीं की थी। लाखों अकाउंट का पैन वैलिडेशन नहीं हुआ था। मल्टीपल कस्टमर्स के लिए सिंगल पैन का इस्तेमाल हो रहा था। कई मौकों पर RBI को बैंक की ओर से गलत जानकारी भी दी गई।
RBI ने 31 जनवरी 2024 को जारी प्रेस रिलीज में कहा है कि 11 मार्च 2022 को पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (PPBL) को एक नोटिस जारी किया गया था। बैंक को नए ग्राहक एड करने से रोक लगा दी गई थी। एक एक्सटर्नल टीम से सारे ऑडिट कराने की भी बात कही थी।
रिलीज में कहा गया है कि सिस्टम ऑडिट रिपोर्ट में एक्सटर्नल ऑडिटर्स को पेटीएम पेमेंट बैंक की वर्किंग में कई तरह की खामी मिली। पता चला कि बैंक ने RBI के नियमों की अवहेलना भी की है। इसके बाद RBI ने कड़ा एक्शन लेने का फैसला लिया। RBI ने 4 बातें कहीं:
29 फरवरी के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक के अकाउंट में पैसा जमा नहीं किया जा सकेगा। इस बैंक के जरिए वॉलेट, प्रीपेड सर्विसेज, फास्टैग और दूसरी सर्विसेज में पैसा नहीं डाला जा सकेगा। हालांकि इंटरेस्ट, कैशबैक और रिफंड कभी भी अकाउंट में क्रेडिट हो सकेगा।
इस बैंक के ग्राहकों के सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट, प्रीपेड उपकरण, फास्टैग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि में मौजूद पैसों के विड्रॉल या उपयोग पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। बैलेंस अवेलेबल होने तक इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
दूसरे नंबर के पॉइंट में बताई गई सर्विसेज के अलावा 29 फरवरी 2024 के बाद कोई भी बैंकिंग सर्विस प्रोवाइड करने की अनुमति पेटीएम पेमेंट बैंक के पास नहीं होगी। UPI सुविधा भी 29 फरवरी के बाद नहीं दी जा सकेगी।
वन97 कम्युनिकेशंस और पेटीएम पेमेंट्स सर्विसेज के नोडल अकाउंट 29 फरवरी 2024 तक बंद होंगे। पाइपलाइन में मौजूद ट्रांजैक्शन और नोडल अकाउंट का सेटलमेंट 15 मार्च 2024 तक पूरा किया जाएगा। उसके बाद कोई और ट्रांजैक्शन की अनुमति नहीं होगी।
राहुल: अच्छा तब तो पेटीएम का भी जवाब आया होगा उसने क्या कहा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: पेटीएम के CEO विजय शेखर शर्मा ने दावा किया है कि पेटीएम काम कर रहा है और 29 फरवरी के बाद भी हमेशा की तरह काम करता रहेगा। मैं पेटीएम टीम के प्रत्येक सदस्य के साथ आपके अथक समर्थन के लिए आपको सलाम करता हूं। हर चुनौती का एक समाधान है।
वन 97 कम्युनिकेशन ने कहा कि एक पेमेंट कंपनी के रूप में, वो अलग-अलग पेमेंट प्रोडक्ट पर कई बैंकों के साथ काम करती है। सिर्फ पेटीएम पेमेंट बैंक के साथ नहीं। प्रतिबंध शुरू होने के बाद से कंपनी ने अन्य बैंकों के साथ काम करना शुरू कर दिया है।
आगे चलकर, कंपनी केवल अन्य बैंकों के साथ काम करेगी, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के साथ नहीं। कंपनी की यात्रा के अगले चरण में वो पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज का विस्तार करेगी, लेकिन इसे केवल अन्य बैंक की पार्टनरशिप में किया जाएगा।
राहुल: RBI के फैसले के बाद पेटीएम बैंक का क्या होगा, ये बंद हो जाएगा? फाइनेंशियल एक्सपर्ट: पेटीएम पेमेंट बैंक में RBI को जो गड़बड़िया मिली हैं अगर उनका समाधान नहीं निकलता है तो बैंक मुश्किल में पड़ जाएगा। किसी दूसरे बैंक के इसे टेकओवर करने की नौबत भी आ सकती है।
अमेरिकी मीडिया के अनुमानों के अनुसार, 81 वर्षीय बाइडेन ने दो बहुत पीछे चल रहे प्रतिद्वंद्वियों पर भारी जीत के साथ अपनी पार्टी के नामांकन के लिए मार्च शुरू किया.
चार्ल्सटन:
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ जारी है, जिसमें मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शनिवार को दक्षिण कैरोलिना डेमोक्रेटिक प्राइमरी में जीत हासिल की. बाइडेन ने कहा कि वह नवंबर के चुनाव में रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रम्प को हरा देंगे. अमेरिकी मीडिया के अनुमानों के अनुसार, 81 वर्षीय बाइडेन ने दो बहुत पीछे चल रहे प्रतिद्वंद्वियों पर भारी जीत के साथ अपनी पार्टी के नामांकन के लिए मार्च शुरू किया.
हालांकि, डेमोक्रेट यह देखने के लिए प्राइमरी के नतीजों पर गौर करेंगे कि क्या कम अप्रूवल रेटिंग से जूझ रहे बाइडेन ने अश्वेत मतदाताओं का समर्थन जीता, जिन्होंने उन्हें चार साल पहले व्हाइट हाउस तक पहुंचाने में मदद की थी? बाइडेन ने एक बयान में कहा, “अब 2024 में दक्षिण कैरोलिना के लोगों ने फिर से बात की है और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपने हमें फिर से राष्ट्रपति पद जीतने की राह पर खड़ा कर दिया है और डोनाल्ड ट्रम्प को फिर से हारा हुआ बना दिया है.”
दक्षिणी अमेरिकी राज्य ने 2020 में व्हाइट हाउस के लिए बाइडेन की राह शुरू की, जब उन्होंने पहले प्राइमरीज़ में कई असफलताओं के बाद अपने अभियान को बदल दिया. प्राइमरी में बाइडेन के पास केवल दो लंबे-चौड़े चैलेंजर थे: मिनेसोटा के कांग्रेसी और जिलेटो मैग्नेट डीन फिलिप्स, और लोकप्रिय लेखक मैरिएन विलियमसन.
बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब मंत्रिमंडल पर माथापच्ची चल रही है। 10 फरवरी को नीतीश सरकार को सदन में बहुमत साबित करना है। NDA के पास फिलहाल 128 विधायक हैं, यानी बहुमत से सिर्फ 6 ज्यादा। वहीं महागठबंधन बहुमत से 7 सीट दूर है। बिहार में सरकार गिरने के बाद तेजस्वी ने कहा था कि असली खेला अभी बाकी है।
नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होकर BJP के साथ सरकार बना रहे थे, तब भी माना जा रहा था कि RJD सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। सबसे ज्यादा 79 विधायकों वाली RJD को कांग्रेस और लेफ्ट के साथ सरकार बनाने के लिए सिर्फ 7 विधायकों की जरूरत थी।
28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार ने महागठबंन तोड़ एनडीए की नई सरकार बना ली। सरकार से आउट होते ही लालू परिवार पर ईडी के एक्शन ने पॉलिटिकल हलचल बढ़ा दी है। भाजपा और जेडीयू खेमे में इसे लेकर खुशी है कि अब खेला नहीं होगा। आरजेडी भी इस कार्रवाई को कैश कराने की तैयारी में है। जानिए लालू और तेजस्वी पर एक्शन से किसे क्या फायदा, ED के पास क्या सबूत हैं? क्या गिरफ्तारी हो सकती है…
कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में आदिवासियों के मुद्दे की अनदेखी कर न तो सत्ता चल सकती है, ना ही सरकार और न ही राजनीति. इसके साथ-साथ उन्हें बांटने वाले किसी भी राजनीतिक दल और संगठन को मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा. बंधु तिर्की ने कहा कि सरना कोड, पांचवीं अनुसूची आदि के साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में आदिवासियों की उपयोजना राशि (ट्राइबल सब प्लान) में कटौती किया जाना, आदिवासियों के हित के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 4 फरवरी को आयोजित आदिवासी एकता महारैली की तैयारी को वे शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे.
आदिवासी एकजुट हैं
बंधु तिर्की ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अधीन के संगठनों द्वारा आदिवासियों को बांटने के लिये जमीन-आसमान एक कर दिया गया है लेकिन उन्हें उनकी चाल में कोई भी सफलता नहीं मिलेगी क्योंकि आदिवासी बिना किसी मतभेद के एकजुट हैं और उन्हें दुनिया की कोई शक्ति अलग नहीं कर सकती. भाजपा एवं केन्द्र के साथ ही जिन-जिन प्रदेशों में भाजपा सत्ता में है वहां आदिवासियों की लगातार अनदेखी की जा रही है. उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में गुमला में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सरना धर्मकोड पर विचार करने की बात कही थी लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ.
बिहार में एनडीए सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने महागठबंधन सरकार की बीस सूत्रीय समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। बीस सूत्रीय समिति को एनडीए सरकार गठन के 5वें दिन भंग किया गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
सभी जिलों के प्रभारी मंत्री तत्काल प्रभाव से हटाए गए इसके साथ ही सभी जिलों के प्रभारी मंत्री को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष और जिलों के प्रभारी मंत्रियों के पहले की निर्गत अधिसूचना को निरस्त करने का भी आदेश जारी किया गया है।
बिहार के सभी 38 जिलों में कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया है। जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति को 20 सूत्रीय भी कहा जाता है। जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को मनोनीत किया गया था।
नई कमेटी में बीजेपी नेताओं को मिलेगी जगह तीन महीने में कमेटी खत्म की गई है। नई कमेटी में बीजेपी नेताओं को जगह दी जायेगी। महागठबंधन सरकार ने 19 अक्टूबर 2023 को बीस सूत्रीय का गठन किया था। 20 सूत्री जिला स्तरीय समिति में जिला प्रभारी मंत्री को अध्यक्ष बनाया जाता है। मुंगेर को छोड़कर बाकी 37 जिलों में कमेटी बनाई गई थी।
उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पटना जिले का अध्यक्ष बनाया गया था। पटना जिला का उपाध्यक्ष अशोक चौधरी थे। सीएम नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में 20 सूत्रीय कमेटी के अध्यक्ष वित्त मंत्री विजय चौधरी को गया था।
अशोक कुमार हिमांशु एवं मो. मशरुर अहमद जुबैरी को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया था। रोहतास जिले के अध्यक्ष लघु जल संसाधन मंत्री जयंत राज और उपाध्यक्ष रामचन्द्र ठाकुर एवं अजय कुमार सिंह थे।
Hemant Soren News झारखंड में सियासी संकट का दौर जारी है। इस बीच चंपई सोरेन के विधायक दल का नेता बनने के बाद सरकार गठन में लगी झारखंड मुक्ति मोर्चा पर भाजपा ने अपना रुख क्लियर कर दिया है। पार्टी सरकार गठन में किसी तरह का गतिरोध नहीं खड़ा करने जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झामुमो और कांग्रेस के गठबंधन में अंदरूनी असंतोष है।
राज्य ब्यूरो, रांची। चंपई सोरेन के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सरकार गठन में लगी झारखंड मुक्ति मोर्चा पर भाजपा की नीति साफ है। पार्टी सरकार गठन में किसी तरह का गतिरोध नहीं खड़ा करेगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झामुमो और कांग्रेस के गठबंधन में अंदरूनी असंतोष है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उनके पास संख्या है तो राज्यपाल उस पर निर्णय करेंगे। भाजपा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आवाज उठाई थी। उसी का नतीजा है कि ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया है। अब पार्टी सरकार गठन के लिए राजभवन और झामुमो गठबंधन के बीच जो हो रहा है उसकी प्रतीक्षा कर रही है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता हेमंत सोरेन के भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने को कानूनी प्रक्रिया बता रहे हैं। लेकिन इससे आदिवासी वोटों में संभावित नाराजगी का आकलन भी किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी झामुमो सरकार गिराने या उसके गठन में किसी गतिरोध के आरोप से बच रही है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिली बढ़त को भाजपा तोड़जोड़ के आरोप से हल्का करने का रिस्क नहीं ले रही है। हालांकि, भाजपा के गोड्डा से सांसद निशिकांत दूबे ने सोशल मीडिया पर झामुमो गठबंधन में संख्या कम रहने की बात कही है।
केंद्रीय नेतृत्व ने भी प्रदेश नेतृत्व को लोकसभा चुनाव पर फोकस करने को कहा है। सरकार के गठन या उससे जुड़े किसी प्रकरण में भाजपा नेताओं को किसी भी तरह का बयान नहीं देने का निर्देश है।
बिहार में महागठबंधन सरकार गिरने के 6 दिन बाद कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि NDA में वापसी के लिए नीतीश कुमार ने कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया, पर सच तो यह है कि उनके 3 खास लोग ललन सिंह, अशोक चौधरी और संजय झा ही इसके असली किरदार थे। ये तीनों जदयू और भाजपा, दोनों जगह बैठ रहे थे।
नौकरियों का क्रेडिट तेजस्वी के लेने और कांग्रेस को दो मंत्री पद न मिल पाने पर भी डॉ. शकील ने बहुत से भेद खोले। दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में डॉ. शकील ने और कौन-कौन सी परतें खोलीं…सिलसिलेवार पढ़िए।
सवाल- नीतीश कुमार ने आप लोगों का साथ छोड़ दिया, इसका कितना असर चुनाव पर पड़ेगा?
जवाब- दोनों पार्टी, बीजेपी और जेडीयू अपने आचार, विचार और किरदार में डबल स्टैंडर्ड की पार्टी हैं। सच तो यह है कि तीन राज्यों में, जहां बीजेपी ने सरकारें बनाईं, वहां कांग्रेस का वोट परसेंट बढ़ गया। इसका मतलब है कि जनता विरोध में है। यह लोकसभा चुनाव 2024 में रिफ्लेक्ट होगा। ऊपर से लग रहा है कि दोनों मिल गए हैं, लेकिन दोनों पर यह इल्जाम तो है ही कि इनका कोई किरदार नहीं है।
सवाल-फिर कैसे आप लोगों ने नीतीश कुमार पर भरोसा कर लिया?
जवाब- जाहिर सी बात है, उनके पास बहाने बहुत सारे हैं। हम लोगों ने नीतीश कुमार को काफी सम्मान दिया। उनकी पार्टी में ललन सिंह, संजय झा और अशोक चौधरी, ये तीन किरदार तो पहले से भारतीय जनता पार्टी के पास जा रहे थे। ये सब हम लोग देख रहे थे। अब देखिए कि नीतीश कुमार पहले जब सीएम पद की शपथ लेते थे और कैबिनेट मिनिस्टर की भी लिस्ट आ जाती थी। अब क्यों देर हो रही है? ऐसे किरदार जब आपस में मिलते हैं तो ऐसी ही स्थिति बनती है।
सवाल-आप क्या कहना चाहते हैं कि नीतीश कुमार को यही तीन किरदार चला रहे हैं?
जवाब- नीतीश कुमार को चलाने में तो कई लोग हैं, लेकिन ये तीनों कभी कुछ, कभी कुछ बोलते रहते हैं। ललन सिंह किस तरह से बोल रहे हैं देख लीजिए।
सवाल-नीतीश कुमार पलटी मारते रहे हैं, उनका बीजेपी के साथ भी काफी लंबा साथ रहा है, फिर आपको भरोसा कैसे हुआ?
जवाब- गलतियां हो जाती हैं। इस तरह की कसमें वे खाने लगे कि हम लोगों को विश्वास हो गया। कहते थे कि देश बर्बाद हो जाएगा, इतिहास बदल रहा है, संविधान बदल रहा है। यह सब बड़े-बड़े जलसों में नीतीश कुमार ने कहा। हमें लगा कि ये गांधी के रास्ते पर आ जाएंगे, लेकिन गांधी और गोडसे को एक साथ चिपकाकर वे राजनीति करेंगे तो उनका कोई इतिहास रह जाएगा क्या?
सवाल- नीतीश कुमार को आपलोगों ने अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया? क्या खतरा दिखा था कांग्रेस को?
जवाब-26 पार्टियां की अलायंस I.N.D.I.A है। नीतीश कुमार से पूछिए कि जहां-जहां उन्होंने अपना हवाई जहाज घुमाया था, वे सब इनके पक्ष में थे क्या? ममता बनर्जी, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, अरविंद केजरीवाल उनके पक्ष में थे क्या? हम लोगों ने ऑफर दिया, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए था। इसका मतलब है कि वे अपना एजेंडा लेकर इंडिया गठबंधन में साथ आए थे। जो होता है, अच्छे के लिए होता है।
सवाल-इंडिया गठबंधन को इससे ताकत मिलेगी या कमजोर होगा?
जवाब- गठबंधन जनता के साथ होता है। जनता इस तरह के दांव-पेंच नहीं समझती है क्या..। जब हमलोग गठबंधन में साथ आए तबलोगों को बिहार में इतनी नौकरियां मिलीं।सवाल- ये क्रेडिट तो जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस तीनों अलग-अलग ले रही हैं?जवाब- वे तो 17 साल से सत्ता में भाजपा के साथ रहे। ये नौकरियां तो पुराना बैकलॉग है। ये डिमांड पुराना था। हमारा दबाव था, तभी इतनी नौकरियां दी गईं।
सवाल- दबाव तो आप लोगों का ऐसा था कि दो और मंत्री पद की मांग कांग्रेस करती रही और नीतीश कुमार ने नहीं ही दिया?
जवाब- मैं जनता के कार्यक्रमों की बात कर रहा हूं। वे नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के बिल्कुल खिलाफ थे। हम लोगों ने इसके लिए मीटिंग करवाई। उनको मानना पड़ा। बिहार के स्कूल-कॉलेजों का क्या हाल बनाकर रख दिया? 15 साल से तो नीतीश कुमार ही सत्ता पर रहे हैं। हमलोगों का दबाव रहा। बीजेपी वाले क्यों नहीं करवा पाए थे नीतीश कुमार से?
सवाल- दो और मंत्री पद आप लोग क्यों नहीं ले पाए?
जवाब- हमलोग सिर्फ ये नहीं चाहते थे कि दो और बर्थ मिल जाएं, बल्कि हमारा बड़ा लक्ष्य बीजेपी को रोकने का है।सवाल- नीतीश कुमार का क्या लक्ष्य था?जवाब- ये वही जानें। वे गाहे-बगाहे बताते रहे हैं। पब्लिक के बीच स्टेटमेंट देते थे कि हमें कुछ नहीं चाहिए, कोई पद नहीं चाहिए और मन में कुछ और रखे हुए थे।
सवाल- बिहार में सरकार जा रही थी और आपकी पार्टी सीमांचल में थी, सारे के सारे विधायक। टूट का खतरा था क्या?
जवाब- कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बिहार के दौरे पर था। हमारे सारे विधायक राहुल गांधी की पदयात्रा में थे। वह बहुत बड़ा कार्यक्रम रहा.. सामाजिक न्याय को लेकर, भाईचारा को लेकर। वहां पहले से कार्यक्रम था। अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह और मैं पांच दिन पहले से पहुंच गए थे।
सवाल- कन्हैया कुमार, बिहार में लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे क्या, वे भी राहुल गांधी के साथ पदयात्रा में रहे?
जवाब- ये फैसला पार्टी के अंदर गठबंधन के साथ मिलकर हम लोग करेंगे। हमारा गठबंधन राजद और लेफ्ट के साथ मजबूती के साथ है। हम लोग तो सीट बंटवारे का काफी काम कर चुके थे, लेकिन संजय झा इधर भी बैठ रहे थे और उधर भी बैठ रहे थे। यही किरदार है क्या?
सवाल- आपको क्या लगता है, बिहार विधानसभा अध्यक्ष को लेकर जो फ्लोर टेस्ट होना है उसमें खेला हो सकता है क्या?
जवाब- ये तो जब होगा तब देखा जाएगा। इस पर अभी बोलने के लिए कुछ नहीं है। कुछ चीजें समय पर तय होती हैं।सवाल- खतरा कांग्रेस, आरजेडी पर ही बताया जा रहा है?जवाब- ये अशोभनीय बात है। ऐसी कोई मिसाल नहीं कि कांग्रेस टूट गई हो। टूट तो जेडीयू और बीजेपी भी सकती है।
सवाल- यह सवाल इसलिए कि सत्ता पक्ष की तरफ राजनीतिक नेताओं का खिंचाव ज्यादा दिखता रहा है?
जवाब- जो परमानेंट सत्ता पक्ष है, उसकी तरफ ज्यादा लोग रहते हैं। लोग अपना भविष्य देखते हैं, किरदार देखते हैं।