हंगामे से 150 मरीजों की चिकित्सा सेवा प्रभावित हुई, सरोज देवी के इलाज में नहीं ली गई एक भी रुपये की राशि: सैम्फोर्ड अस्पताल
प्रेस वार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने रखा पक्ष, कहा – तथ्यों से परे आरोप लगाकर अस्पताल की छवि धूमिल करने का किया गया प्रयास
सैम्फोर्ड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कोकर द्वारा गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने हाल के दिनों में अस्पताल को लेकर लगाए गए आरोपों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि एक सामाजिक संगठन के बैनर तले अस्पताल परिसर में किया गया हंगामा न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाला था, बल्कि इससे अस्पताल में भर्ती लगभग 150 मरीजों की चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हुईं।प्रेस वार्ता में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. घनश्याम सिंह, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. श्रीरीन खंडेकर, क्रिटिकल केयर हेड डॉ. डी.एस.एन. राय, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. युवराज लहरे, जनरल मैनेजर दिवाकर मेहता एवं कमलेश कुमार उपस्थित थे।अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से एक मरीज के इलाज को लेकर अस्पताल के खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। मीडिया के समक्ष अस्पताल ने मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, उपचार प्रक्रिया और अन्य रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हुए पूरे मामले को तथ्यात्मक रूप से रखने का प्रयास किया।
अस्पताल परिसर में अचानक पहुंच गए 25-30 लोग
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 17 जून को दोपहर करीब 3 बजे उन्हें जानकारी मिली कि अस्पताल परिसर के बाहर किसी संगठन द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी।
अस्पताल के अनुसार कुछ देर बाद संपूर्णा संकटमोचन फाउंडेशन के बैनर तले अमीषा प्रसाद अपने समर्थकों एवं अन्य लोगों के साथ अस्पताल परिसर पहुंचीं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उनके साथ लगभग 25 से 30 लोग मौजूद थे।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इन लोगों ने मुख्य प्रवेश द्वार से अस्पताल परिसर में प्रवेश किया और ओपीडी क्षेत्र तक पहुंच गए। अस्पताल कर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि अस्पताल में उस समय 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं और किसी प्रकार की भीड़ अथवा हंगामे से मरीजों को परेशानी हो सकती है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
ओपीडी और जांच सेवाएं हुईं प्रभावित
प्रबंधन का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ अस्पताल के भीतर पहुंचने से ओपीडी की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो गई। अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार लगभग एक घंटे तक ओपीडी की गतिविधियां बाधित रहीं।इस दौरान रेडियोलॉजी विभाग की सेवाओं पर भी असर पड़ा। अस्पताल का कहना है कि कुछ मरीजों के सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स-रे निर्धारित समय पर नहीं हो सके। कई मरीजों और उनके परिजनों को इंतजार करना पड़ा।अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह स्थिति चिकित्सा सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती थी, क्योंकि अस्पताल में कई गंभीर मरीज भर्ती थे, जिनका इलाज लगातार चल रहा था।
हंगामे के कारण बना तनावपूर्ण माहौल
प्रबंधन ने आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों और सुरक्षा कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा अस्पताल के सामान्य कार्य में बाधा पहुंचाई गई।
अस्पताल के अनुसार इस घटना के संबंध में सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और अस्पताल ने जांच एजेंसियों को सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है।
सरोज देवी के इलाज को लेकर अस्पताल ने रखे दस्तावेज
प्रेस वार्ता का प्रमुख विषय मरीज सरोज देवी का इलाज रहा, जिनके मामले को लेकर अस्पताल पर कई आरोप लगाए गए थे।क्रिटिकल केयर हेड डॉ. डी.एस.एन. राय ने बताया कि सरोज देवी को 5 जून 2026 को शाम 4:09 बजे गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।डॉ. राय ने कहा कि मरीज मल्टी ऑर्गन संबंधी जटिल समस्याओं से जूझ रही थीं। भर्ती होने के बाद उन्हें तत्काल आईसीयू में रखा गया तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा उपचार शुरू किया गया।उन्होंने बताया कि मरीज को लंबे समय तक क्रिटिकल केयर में रखा गया और आवश्यकता के अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया। उपचार के दौरान न्यूरोलॉजी, क्रिटिकल केयर और अन्य विभागों के चिकित्सकों ने लगातार उनकी निगरानी की।
परिजनों को लगातार दी जाती रही जानकारी
प्रेस वार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों को समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती रही।मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. घनश्याम सिंह ने बताया कि अस्पताल की मानक प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कंसेंट (सहमति) भी परिजनों से ली गई थी। उपचार से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी मरीज के परिजनों के साथ साझा की गई।
उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी और चिकित्सा टीम पूरी क्षमता के साथ उपचार कर रही थी।
12 लाख रुपये वसूली के आरोप को बताया गलत
प्रेस वार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने उस आरोप का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि मरीज से लगभग 12 लाख रुपये की वसूली की गई।जनरल मैनेजर दिवाकर मेहता ने कहा कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने बताया कि मरीज का उपचार कैशलेस व्यवस्था के अंतर्गत किया जा रहा था।अस्पताल के अनुसार उपचार के विभिन्न चरणों में परिजनों को अनुमानित खर्च दिया गया था, लेकिन अनुमानित खर्च और वास्तविक भुगतान में अंतर होता है।उन्होंने बताया कि मरीज के इलाज पर लगभग 8.5 लाख रुपये का खर्च कैशलेस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत था। यह राशि संबंधित बीमा अथवा कॉर्पोरेट व्यवस्था के माध्यम से भुगतान की जानी थी।अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीज अथवा उनके परिजनों से एक भी रुपये की नकद राशि नहीं ली गई और न ही किसी प्रकार का आर्थिक दबाव बनाया गया।
इलाज नहीं रोका गया
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि मरीज की स्थिति गंभीर होने के बावजूद इलाज लगातार जारी रखा गया।डॉ. श्रीरीन खंडेकर ने कहा कि अस्पताल की प्राथमिकता मरीज की जान बचाना होती है। आर्थिक मामलों के कारण उपचार को प्रभावित नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि मरीज को आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।
अस्पताल ने उठाए गंभीर सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि किसी भी चिकित्सा मामले को तथ्यों और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना चाहिए।प्रबंधन का कहना है कि किसी भी आरोप की सत्यता की जांच किए बिना अस्पताल के खिलाफ सार्वजनिक अभियान चलाने से मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सा संस्थानों के प्रति लोगों के विश्वास पर असर पड़ता है।अस्पताल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को शिकायत थी तो उसके लिए प्रशासनिक और कानूनी मंच उपलब्ध थे, लेकिन अस्पताल परिसर के भीतर हंगामा करना उचित नहीं था।
जांच में सहयोग करेगा अस्पताल
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि वह पूरे मामले में जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग देगा। अस्पताल ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार से जुड़े दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।प्रबंधन ने कहा कि उन्हें न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है और जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रेस वार्ता के अंत में अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदनाएं अस्पताल की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।अस्पताल ने कहा कि वह समाज, मीडिया और सभी सामाजिक संगठनों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी विवाद का समाधान तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।



