यूँ तो जितिया व्रत की चील-सियारान की व्रत कथा बहुत प्रचलित है पर हर घर में जितिया की अपनी-अपनी व्रत कथा भी जरूर होती है, जो समय के साथ यादों और कहानियों में बदल जाती है। तो चलिए पहले जानते हैं जितिया व्रत के बारे में विस्तार से और फिर ले चलती हूं मैं आपको अपने साथ कहानियों के एक सफर में। जीवित पुत्रीका व्रत जिसे साधारण भाषा में जिउतिया या जितिया भी कहा जाता है सबसे कठिन व्रतों में से एक है क्योंकि इसमें व्रती महिलाएं लगभग छत्तीस घंटे निर्जला व निराहार रहकर इस व्रत को करतीं हैं। जितिया व्रत का आरम्भ हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के नहाय -खाय से आरंभ होती है। नहाय -खाय का अर्थ होता है खुद को सात्विकता और शुद्धता से भर लेना। नहाय-खाय के दिन व्रती को बाल धोकर स्नान करने के पश्चात ही प्याज-लहसुन से परे विशेष रूप से साफ-सफाई के साथ भोजन बनाकर भोजन ग्रहण करने का नियम होता है। नहाय -खाय की रात्रि भोजन के पश्चात ब्रह्म मुहूर्त यानि सूर्योदय से पहले सरगी के रूप में कुछ मीठा खाया जाता है और दूध या शरबत पिने का नियम है। कुछ व्रती इसमें एक चम्मच घी भी पीती हैं। ऐसी मान्यता है की घी गले को कुछ हद तक तर रखता है। इसके बाद अखंड उपवास और संध्या काल के समय पीपल या पाकड़ वृक्ष की पूजा करते हुए राजा जितवाहन व चील-सियारिन की कथा सुन पंडित को दान किया जाता है और जितिया जो एक सोने या चांदी का बना लॉकेट की तरह होता है, धारण किया जाता है और एक खीरे को चढ़ाकर उसमें दिये की कालिख लगाई जाती है। इसके अतरिक्त हर घर के अपने भी कुछ अलग-अलग नियम होते हैं जिसके अनुसार व्रती अपनी पूजा सम्पन्न करतीं हैं फिर अगले दिन उसी अखंड उपवास की अवस्था में भात, कुसी कराई का झोर (दाल), अनेक प्रकार की सब्जियां और नाना प्रकार के व्यंजन अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार व्रती पकाती हैं जिसे ‘पारण का भात’ कहते हैं। स्नान-दान पूजा-अर्चना करने के बाद सर्वप्रथम यह भोजन पितरों व चील-कौओं के नाम से दक्षिण दिशा में अर्पित किया जाता है उसके बाद गोटा (साबुत) देसी चना व खीरे के बीज को शरबत के साथ निगल कर व्रत तोड़ा जाता है और पूजा के दौरान चढ़ा हुआ जो खीरा था उसकी कालिख को माँ अपने बच्चों कि आँखों में काजल की तरह लगा देती है कहते हैं कि इससे आँखों की रौशनी तेज होती है फिर उसी खीरे को और प्रसाद के साथ बच्चों को खाने को दिया जाता है। इस खीरे को खाकर बच्चे दीर्घायु होते हैं। तो यह थी जितिया व्रत की विस्तृत जानकारी। चलिए अब मैं सुनाती हूं आपको इस व्रत से जुड़ी अपनी कहानी एक संवाद के रूप में “बक न मम्मी! हम नहीं जायेंगे बार-बार ऊ बकरी लोग को बनौना (सब्जी व फल के छिलके) देने। एक बार कहो तब ना तुम बार-बार भेजते रहती हो खाली मेरा काम बढ़ाते रहती हो।” ” जाओ ना बेटा तनी सा देले आना। देखो तो सब बकरिया गाभिन (गर्भवती) है। केतना भूख लगता होगा ऊ लोग को रे तुम को का पता?” “तो जो पाला है वह लोग जाने वह लोग हम लोग के भरोसे थोड़ी ना पाला है। जब खिलाना ही नहीं था तो फिर पाला ही क्यों?” “अब ई कोई बात हुआ, ई सब में ऊ बकरी लोग का का दोस? भूख से पालने वाला नहीं मर रहा मर तो ऊ अनबोलता धन रहा है न।” “अगर घर का जुट्ठा-कुट्ठा अउ बनौना से किसी का पेट भरता है तो तुमको का दिक्कत है? तनी सा जाहि न पड़ेगा। तुमको का पता माँ बनना केतना बड़ा तप है, केतना कष्ट है, केतना भूख लगता है उस समय। थोड़ा सा सेवा कर दिया करो उन लोग का भी।” “हम काहे करें सेवा ऊ गाय है का? सेवा तो गाय लोग का किया जाता है आखिर गाय हमारी माता है इसलिए उसका सेवा करने से पुण्य भी मिलता है।” “ठीक है तो बाकी जीव जंतु को यथासंभव अपना संतान मान के सेवा करो। संतान का सेवा करना कर्तव्य होता है और अपना कर्तव्य निभाने से भी पुण्य मिलता है। पुण्य कमाने के लिए जरुरी नहीं कि सोना-चाँदी, हिरा-मोती दान किया जाय। पुण्य कमाने के लिए तो घर का कचड़बो से आदमी पुण्य कमा लेता है। मन में बस सच्चा सेवा भावना होना चाहिए। जानते हो बेटा हम तुम लोग के लिए ई जितिया का व्रत काहे रखते हैं। काहे कि जो कोई भी कुछ बनाता है, गढ़ता, सृजन करता है ऊ हमेशा यही चाहता है कि उसका रचना युगों-युगों तक सुरक्षित रहे और मां बनना दुनिया का सबसे बड़ा कठोर तप है, सबसे अनोखा सृजन इसलिए एक मां कभी नहीं चाहती है कि उसके आंखों के आगे उसका सृजन पर कोई आंच भी आये। ए गो कहावत है न कि जेकर पैर में फटे बयार ओ ही जाने दरद का हाल। देखना जब तुम मां बन जाओगी ना तो तुमको भी बकरी, कुत्तिया, सुअरी, चुहिया हर मादा में बस माँ और उसका तप ही दिखने लगेगा। अपने नजर से तुम अभी बस इतना ही समझो कि अगर हम कभी न रहें या तुम कहीं जाओ और तुमको भूख लगे तो तुमको लोग खाना दे दे, प्यार करे, अपनी बेटी समझे ऊ अच्छा लगेगा या ई कह के दुत्कार दे कि भाग यहाँ से हमर बेटी है जे हम करिये? जे पैदा करलके है ऊ जाने।” “मम्मी दूसरा बाला।” “हाँ, तो समय कभी भी एक सा नहीं रहता, हमेशा बदलते रहता है बेटा तो अच्छे समय में वही बीज बोना जो बुरे समय में काट सको। सबको अपना मान के यथासम्भव सेवा करना पुण्य है और अपने- पराए में भेद करके केवल अपना सोचना पाप और यही तो है माया का बंधन भी। उस दिन के बाद से आज तक चाहे लाख व्यस्तता रही लेकिन मेरे द्वारा घर के कचरे से, जिसमें प्लास्टिक और हानिकारक अपशिस्ट का एक टुकड़ा भी न होता, बकरियों का पेट भरता रहा और सच जब मैं माँ बनने वाली थी तो कई बार ऐसे अवस्था से दो-चार हुई जब तबियत खराब होने के कारण खाना नहीं बना पाती थी और घर पे कोई होता भी नहीं था। सच मैं भूख से छटपटा उठती थी। तब कई बार अड़ोस-पड़ोस की मामी-चाची कुछ खाने को भिजवा देती थी और कई बार उनके घर के द्वार मेरी क्षुदा तृप्ति के लिए खुले मिलते थे मुझे। तब माँ की वो दो बातें कि अच्छे समय में वही बीज बोना जो बुरे समय में काट सको और जेकर पैर में फटे बयार वही जाने दरद का हाल… कान में गूंज जाया करती और सच अब मुझे भी सृष्टि की हर मादा प्रजाति में अपनी माँ की तरह ही केवल उसका माँ होना और उसका कष्ट और तप ही दीखता है और मैं भी आज ये कठोर व्रत कर पाति हूँ जबकि मुझे अपनी माँ को इस व्रत को करते देख बहुत अचम्भा होता था कि बिना खाए-पिए तो लोगो की बोलती ही बंद हो जाती है और वो इतनी सहजता से सब काम कर के अगली सुबह कैसे पारण का भात बनाती थी। पर सिर्फ एक प्रार्थना कि प्रभु मेरे व्रत को सफल करना और व्रत सफल हो जाता है। इसका फल मिलता है कि नहीं ये तो बस आस्था का विषय है लेकिन अक्सर जब हम कोई बड़ी परेशनी से उबर जाते हैं तो अक्सर लोगों को ये कहते सुना है “जरूर तोर माई जितिया करलको होत से-से तू बच गेलहीं न त मुस्किल हलओ बाबू।”
दिनांक 23.09.2024 को वरीय पुलिस अधीक्षक राँची को गुप्त सूचना मिला कि सुखदेवनगर थाना अन्तर्गत किशोरगंज रोड नंबर, 05. थाना सुखदेवनगर जिला राँची के पास अवैध नशीले पदार्थों का खरीद बिक्री हो रही है। उक्त सूचना के आलोक में पुलिस अधीक्षक नगर के नियंत्रण में एवं पुलिस उपाधीक्षक कोतवाली के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया। गठित छापामारी टीम के द्वारा सुखदेवनगर थाना अन्तर्गत किशोरगंज रोड नंबर 05, थाना सुखदेवनगर जिला राँधी के पास से पुलिस बल को देख भागने के क्रम में दो व्यक्ति नाम कमशः 1. सित्ती राम, उम्र करीब 20 वर्ष, पिता स्व० मुकेश राम, पता किशोरगंज हरमु रोड, बाल्मीकी नगर, संतोषी मंदिर के पास, थाना सुखदेवनगर जिला राँची एवं 2. अभिषेक कुमार यादव उर्फ गोलु यादव, उम्र करीब 23 वर्ष, पिता सचिदानंद राय, सा०- किशोरगंज रोड नंबर 05. थाना सुखदेवनगर जिला रांची को पकड़ा गया। इस क्रम में एन०डी०पी०एस० एक्ट के अधीन नियमों का अनुपालन करते हुए विधिवत उनके शरीर की तलाशी ली गई। तलाशी के क्रम में सित्ती राम के पास से (1) 07 पुडिया ब्राउन शुगर जिसका वजन 0.70 ग्राम तथा अभिषेक कुमार यादव उर्फ गोलु के पास से (1) 09 पुडिया ब्राउन शुगर जिसका वजन 1.20 ग्राम, (2) ब्लु रंग का I-TEL कंपनी का स्मार्टफोन जिसका IMEI ΝΟ- 351606785979401 एवं 351606785979419, तथा (3) एक सफेद एव काले रंग का यामाहा एम०टी० मोटरसाईकिल जिसका रजिस्ट्रेशन संख्या- JH01 EE 3891 को बरामद किया गया जिसके बारे में सित्ती राम एवं अभिषेक कुमार यादव उर्फ गोलु यादव द्वारा स्वयं स्वीकार किया कि यह सिल्बर फॉईल में लपेटा हुआ पुड़िया में नशीला पदार्थ ब्राउन शुगर है। इस संबंध में सुखदेवनगर थाना कांड संख्या-494/24, दिनांक 23.09.2024, धारा- धारा 21 (a) /22 एन०डी०पी०एस० एक्ट 1985 के तहत दर्ज कर अनुसंधान की जा रही है।
गिरफ्तार प्राथमिकी अभियुक्त का नाम पता-
सित्ती राम, उम्र करीब 20 वर्ष, पिता स्व० मुकेश राम, पता किशोरगंज हरमु रोड, बाल्मीकी नगर, संतोषी मंदिर के पास, थाना सुखदेवनगर जिला राँची
अभिषेक कुमार यादव उर्फ गोलु यादव, उम्र करीब 23 वर्ष, पिता सचिदानंद राय, सा०- किशोरगंज रोड नंबर 05, थाना सुखदेवनगर जिला रांची
काड में बरामद सामानों की सूची
1) सिल्वर फॉईल में लपेटा हुआ कुल 16 पुडिया प्रतिबंधित नशीला पदार्थ ब्राउन शुगर जिसका वजन करीब 1.90 ग्राम। 2) एक ब्लु रंग का।-TEL कंपनी का स्मार्टफोन जिसका IMEI NO-351606785979401 एवं 351606785979419
3) एक सफेद एव काले रंग का यामाहा एम०टी० मोटरसाईकिल जिसका रजिस्ट्रेशन संख्या – JH01 EE 3891
अपराधिक इतिहासः-
सित्ती राम, उम्र करीब 20 वर्ष, पिता स्व० मुकेश राम, पता किशोरगंज हरमु रोड, बाल्मीकी नगर, संतोषी
मंदिर के पास, थाना सुखदेवनगर जिला राँची का अपराधिक इतिहासः ) सुखदेवनगर थाना कार्ड संख्या- 371/24, धारा-21(ए)/22 एन०डी०पी०एस० एक्ट
क 2. अभिषेक कुमार यादव उर्फ गोलु यादव, उम्र करीब 23 वर्ष, पिता सचिदानंद राय, सा०- किशोरगंज रोड नंबर
दिल्ली का श्रद्धा वाकर मर्डर केस आज भी लोग भूले नहीं है. 27 साल की श्रद्धा को उसके 28 साल के प्रेमी और लिव-इन पार्टनर आफ़ताब अमीन पूनावाला ने 18 मई 2022 को मार डाला था. इसके बाद उसने श्रद्धा की लाश को ठिकाने का जो तरीका अपनाया था, उसे जानकर पुलिस ही नहीं बल्कि पूरा देश सन्न रह गया था. ठीक उसी तरह अब बेंगलुरु में कत्ल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे जानकर किसी भी आम इंसान के होश उड़ सकते हैं.
बेंगलुरु का व्यालीकवल इलाका. 6 क्रॉस पाइप लाइन रोड पर मौजूद एक तीन मंजिला बिल्डिंग. और उस इमारत के कमरे में रखा 165 लीटर मॉडल का एक सिंगल डोर फ्रिज. उसी फ्रिज में पूरे 19 दिनों तक 29 साल की महालक्ष्मी की लाश के करीब 30 से 40 टुकड़े बंद थे. 30 से 40 टुकड़े इसलिए क्योंकि कई टुकड़े तो फ्रिज के बाहर उस कमरे के फर्श तक पर बिखरे पड़े थे. खुद बेंगलुरु पुलिस को याद नहीं कि उन्होंने इससे पहले कभी इतना ख़ौफनाक या दहला देने वाला मंजर या यूं कहें कि क्राइम सीन देखा हो. शुरुआत में तो खुद पुलिस वाले इस कमरे में जाने की बजाय उल्टे पांव लौट गए थे. कमरे में टुकड़ों की शक्ल में सबूत ऐसे बिखरे पड़े थे कि बेंगलुरु की फॉरेंसिक टीम को भी उसे समेटने के लिए सरकारी अस्पताल के मेडिकल स्टाफ को बुलाना पड़ा.
पांच महीने से किराए पर रह रही थी महालक्ष्मी दरअसल, करीब 19 दिन बाद इस कमरे का दरवाज़ा बीते शनिवार यानी 21 सितंबर को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे खुला था. उस बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर पांच महीने पहले ही महालक्ष्मी किरायेदार के तौर पर रहने आई थी. नेपाल की रहने वाली महालक्ष्मी वहां अकेली रहती थी. पड़ोसी भी उसे नहीं जानते थे. वजह ये थी कि हर रोज़ वो सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकलती और रात साढ़े दस के बाद ही घर लौटती. महालक्ष्मी की मां और बहन बेंगलुरु में रहते हैं. दो सितंबर के बाद अचानक महालक्ष्मी का फोन बंद हो गया. उसकी मां और बहन लगातार फोन करते रहे, पर बात नहीं हो रही थी.
पड़ोसियों ने की थी बदबू की शिकायत इसी बीच 20 सितंबर को कुछ पड़ोसियों ने बिल्डिंग के मालिक को शिकायत करते हुए बताया कि बंद पड़े महालक्ष्मी के घर के अंदर से अजीब सी बदबू आ रही है. रेंट एग्रिमेंट के वक़्त इमरजेंसी कॉन्टैक्ट के तौर पर महालक्ष्मी ने बेंगलुरु में ही रहने वाली अपनी मां और बहन का पता और फोन नंबर दिया था. मकान मालिक ने महालक्ष्मी की मां को फोन किया और उन्हें महालक्ष्मी के घर से आ रही बदबू के बारे में जानकारी दी. बीते 19 दिनों से वैसे ही महालक्ष्मी से मां की बात नहीं हुई थी. मकान मालिक की बात सुन कर वो घबरा गई. महालक्ष्मी के घर की एक चाबी मां के पास रहती थी. वो फौरन चाबी लेकर अपनी दूसरी बेटी के साथ महालक्ष्मी के साथ घर पहुंची.
फर्श पर पड़ा था खून और मांस के टुकड़े मकान मालिक और पड़ोसियों की मौजूदगी में घर का दरवाजा खोला गया. लेकिन दरवाज़ा खुलते ही अंदर से इतनी तेज़ बदबू आई कि सभी पीछे हट गए. कुछ देर बाद हिम्मत कर फिर से वो अंदर गए. फर्श पर हर तरफ खून के निशान थे. मांस के छोटे-छोटे लोथड़े यहां वहां पड़े थे. और खून की एक सूखी हुई लकीर कमरे में रखे फ्रिज तक जा रही थी. जैसे ही फ्रिज का दरवाजा खुला एक चीख के साथ सभी लोग उल्टे पैर कमरे से बाहर की तरफ भागे. उस एक पल में उन्होंने जो कुछ फ्रिज के अंदर देखा, वो दहलाने वाला था.
फ्रिज में रखे थे दो इंसानी पैर और एक सिर मकान मालिक सब कुछ समझ चुका था. उसने फौरन पुलिस को फोन किया. आनन-फानन में पुलिस भी मौके पर पहुंची. अब पुलिस कमरे में दाखिल हुई. लेकिन बदबू इतनी तेज थी कि उनसे रुका नहीं गया. पुलिस टीम भी बाहर निकल आई. फिर डबल मास्क मंगाया गया. डबल मास्क पहनकर फिर से पुलिस कमरे में गई. फ्रिज का दरवाजा खुला था. सामने सबकुछ दिख रहा था. फ्रिज के सबसे ऊपरी खाने में दो इंसानी पैर रखे थे. बीच के खाने में इंसानी जिस्म के अलग-अलग हिस्से और सबसे निचले खाने में रखा था एक सिर… महालक्ष्मी का सिर.
लाश समेटने के लिए बुलाया गया मुर्दाघर का स्टाफ अब फ्रिज के बाहर पुलिस की नजर कमरे के फर्श पर पड़ी. फर्श पर नजर पड़ते ही खुद पुलिस वालों के पांव कांप गए. जमे हुए खून के साथ-साथ छोटे-छोटे मांस के टुकड़े इर्द-गिर्द पड़े थे. अब फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री एंड सीन ऑफ क्राइम ऑफिसर्स यानी ‘सोको’ को मौके पर बुलाया गया. सोको के लिए भी ये एक अजीब क्राइम सीन था. ऐसे क्राइम सीन से सबूत बटोरना हद से ज्यादा मुश्किल था. लिहाजा, अब मदद के लिए सोको की टीम ने बोरिंग अस्पताल के मुर्दाघर के स्टाफ को बुलाया. मुर्दाघर के स्टाफ के पहुंचने के बाद फ्रिज से लेकर फर्श तक पर बिखरे लाशों के टुकड़ों को समेटा गया. और इसी समेटने के दौरान ये अंदाजा हुआ कि लाश के टुकड़ों की तादाद तीस से चालीस के दरम्यान थी. टुकड़ों में बंटी इस लाश को अब मुर्दा घर भेज दिया गया.
कौन था महालक्ष्मी का कातिल? लाशों के टुकड़े समेटने के बाद अब पुलिस ने कमरे की तलाशी ली. तलाशी के दौरान महालक्ष्मी के बेड पर रखा एक मोबाइल मिला. ये मोबाइल महालक्ष्मी का ही था. जब मोबाइल की सीडीआर यानी कॉल डिटेल रिकॉर्ड को चेक किया गया, तो पता चला कि इस फोन से आखिरी कॉल 2 सितंबर को किया गया था. दो सितंबर के बाद से ना तो इस फोन से कोई कॉल की गई और ना ही कोई कॉल रिसीव की गई. इसी से बेंगलुरु पुलिस ने अंदाजा लगाया कि महालक्ष्मी का क़त्ल 2 से 3 सितंबर के दरम्यान ही हुआ है. पर सवाल ये था कि आखिर किसी ने इतनी बेरहमी से महालक्ष्मी का कत्ल क्यों किया? आखिर किसी की उससे क्या दुश्मनी थी? वो क़ातिल कौन था? तो अब बेंगलुरु पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की.
साल 2023 में पति से अलग हो गई थी महालक्ष्मी महालक्ष्मी की मां और बहन से शुरुआती पूछताछ के बाद पता चला कि साल 2019 तक ये पूरा परिवार नेपाल में ही रहता था. उसी साल महालक्ष्मी की हेमंत दास नाम के एक नेपाली लड़के से शादी हुई थी. शादी के बाद दोनों रोजगार और बेहतर जिंदगी की उम्मीद लिए नेपाल से बेंगलुरु पहुंचे. बेंगलुरु में हेमंत एक मोबाइल शॉप पर काम करने लगा. जबकि महालक्ष्मी को एक नामचीन मॉल के ब्यूटी शॉप में बतौर सेल्स वूमेन टीम लीडर की नौकरी मिल गई. दोनों बेंगलुरु के नीला मंगला इलाके में किराये के घर में रहने लगे. बाद में दोनों की एक बेटी हुई. साल 2023 तक उनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक था. लेकिन 2023 में हेमंत और महालक्ष्मी अलग हो गए. बेटी हेमंत दास के साथ रहती थी. जबकि महालक्ष्मी पांच महीने से व्यालीकवल इलाके में किराये के मकान में रह रही थी, वो भी अकेली. हर 15 दिन या महीने में एक बार वो अपनी बेटी से मिलने हेमंत के घर जाया करती थी.
महालक्ष्मी पर शक करता था पति हेमंत तफ्तीश के मुताबिक, हेमंत और महालक्ष्मी के बीच दूरी की वजह थी लव ट्रायंगल. हेमंत को शक था कि उत्तराखंड के रहने वाले एक हेयर ड्रेसर अशरफ और महालक्ष्मी के बीच अफेयर चल रहा है. इसी बात को लेकर हेमंत और महालक्ष्मी के बीच काफी झगड़ा होता था. इसी झगड़े की वजह से करीब 9 महीने पहले महालक्ष्मी अपने पति हेमंत से अलग रहने लगी थी. कुछ महीने मां और छोटी बहन के साथ रही और फिर पांच महीने पहले किराये के घर में शिफ्ट हो गई थी.
अजनबी शख्स पर पुलिस को शक पड़ोसियों के मुताबिक, महालक्ष्मी आस पड़ोस में ज्यादा लोगों से घुली मिली नहीं थी. वो किसी से बात भी नहीं करती थी. रोजाना सुबह साढ़े नौ बजे काम पर चली जाती और रात साढ़े दस के बाद घर लौटकर आती थी. पड़ोसियों ने कई बार एक अजनबी शख्स को महालक्ष्मी को घर से पिक और ड्रॉप करते जरूर देखा था. लेकिन वो शख्स कौन था, कोई नहीं जानता. बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक, वो इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर वो अजनबी है कौन? बकौल पुलिस बहुत मुमकिन है कि महालक्ष्मी का क़ातिल वही अजनबी हो.
पति और हेयर ड्रेसर से लंबी पूछताछ बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक, वो अब तक महालक्ष्मी के पति हेमंत दास और उस हेयर ड्रेसर अशरफ से लंबी पूछताछ कर चुकी थी. लेकिन इन दोनों से शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि महालक्ष्मी के क़त्ल में इन दोनों का कोई हाथ नहीं था. इन दोनों के मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड में भी दो सितंबर से 19 सितंबर तक ऐसा कुछ नहीं मिला, जिनसे इन पर शक किया जा सके. तो फिर सवाल ये था कि आखिर महालक्ष्मी का क़ातिल है कौन? कौन है जिसने इतनी बेदर्दी से उसका क़त्ल किया और लाश के टुकड़ों को फ्रिज में ठूंस दिया?
अब अजनबी पर था पुलिस का फोकस बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक, महालक्ष्मी के मोबाइल की कॉल डिटेल भी शक की सुई को अजनबी की तरफ घूमा रही थी. हालांकि बकौल पुलिस उस अजनबी की जानकारी उनके पास है. उसका नाम भी उन्हें पता है. यहां तक कि ये भी पता है कि महालक्ष्मी के क़त्ल के बाद वो भुवनेश्वर के रास्ते पश्चिम बंगाल जा चुका है. पुलिस इसलिए उसके नाम का फिलहाल खुलासा नहीं करना चाहती ताकि वो अलर्ट ना हो जाए. पर बेंगलुरु पुलिस की मानें तो एक बार वो शख्स हाथ आ गया, तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे.
पुलिस की थ्योरी में दम पुलिस तफ्तीश में ये भी पता चला है कि 2 सितंबर यानी जिस दिन से महालक्ष्मी ग़ायब हुई और उसका मोबाइल बंद हुआ, तभी से महालक्ष्मी के घर पर कभी कोई नहीं आया. यहां तक कि पड़ोसियों ने भी दो सितंबर या उसके बाद कभी महालक्ष्मी के घर से कोई ऐसी आवाज नहीं सुनी, जिससे उन्हें शक होता. हालांकि क्राइम सीन को देखने के बाद पुलिस का मानना है कि महालक्ष्मी का क़त्ल इसी कमरे में हुआ था. इस थ्योरी के पीछे की वजह ये है कि जिस इलाके में महालक्ष्मी रहती है, वहां किसी लाश को लेकर पहली मंजिल तक जाना मुमकिन नहीं है. बकौल पुलिस बहुत मुमकिन है कि क़त्ल से पहले महालक्ष्मी को कोई बेहोशी या नींद की दवा दी गई हो और इसीलिए घर से कोई आवाज़ नहीं आई.
जल्दबाजी में नहीं था कातिल जिस तरह से कत्ल के बाद महालक्ष्मी की लाश के टुकड़े किेए गए, उसे देखकर पुलिस को लगता है कि कातिल जल्दबाज़ी में नहीं था. यानी क़ातिल ने घर के अंदर तसल्ली से लाश के टुकड़े किए. यानी क़त्ल के बाद भी वो कई घंटे या बहुत मुमकिन है पूरी रात वहीं रहा. हालांकि हैरानी इस बात पर है कि किसी ने भी उसे जाते हुए नहीं देखा.
CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही पुलिस जिस घर में महालक्ष्मी रहती थी, उस बिल्डिंग के आस-पास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस खंगाल रही है. पुलिस को उम्मीद है कि वारदात की टाइमिंग को देखते हुए किसी ना किसी कैमरे में वो अजनबी जरूर कैद हुआ होगा. वैसे जो पुलिस ये तक जानती हो कि क़ातिल भुवनेश्वर के रास्ते पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है, तो जाहिर है वो क़ातिल का असली नाम चेहरा भी जरूर जानती होगी. लिहाजा उम्मीद कीजिए कि बहुत जल्द वो चेहरा और नाम भी सामने आ जाएगा.
दिल्ली के श्रद्धा मर्डर केस जैसा है महालक्ष्मी का कत्ल महालक्ष्मी हत्याकांड का मामला साल 2022 के श्रद्धा मर्डर केस जैसा है. महालक्ष्मी के कत्ल के 19 दिनों बाद तक लाश के टुकड़े फ्रिज में थे. दिल्ली में श्रद्धा का क़त्ल 18 मई 2022 को हुआ था. जबकि क़त्ल का खुलासा नवंबर में हुआ था. क़त्ल के बाद आफताब करीब महीने भर तक फ्रिज से निकाल-निकाल कर लाश के टुकड़ों को किश्तों में ले जाकर जंगल में ठिकाने लगाता रहा. महालक्ष्मी शादीशुदा थी लेकिन पति से अलग रह रही थी. श्रद्धा बिना शादी के आफताब के साथ लिवइन में रहती थी. श्रद्धा के किसी और के साथ रिश्ते को लेकर आफताब को शक था. महालक्ष्मी केस में उसके पति हेमंत को उसके अफयेर का शक था. लेकिन ये शक महालक्ष्मी के क़त्ल की वजह बना या कहानी कुछ और है? इसका खुलासा तभी होगा, जब क़ातिल पुलिस की गिरफ्त में होगा. हालांकि आफताब की तरह महालक्ष्मी के केस में फिलहाल पुलिस ने उसके पति हेमंत दास को एक तरह से क्लीन चिट दे दी है.
राँची। बेड़ो पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बेड़ो महावीर चौक 12 चक्का ट्रक (जे एच 01 बी एच 5545) में अवैध रूप से भरकर कर ले जा रहे गौवंशीय पशु को काफी मशक्कत के बाद धर दबोचा।
वहीं चालक भागने में सफल रहा। जबकि ट्रक के ऊपर सो रहा एक युवक मौका देख कर भागने लगा। जिसे पुलिस ने खदेड़ कर पकड़ लिया। वहीं मवेशी लदा ट्रक को जब्त कर थाना ले आई।
पकड़े गए गौ तस्कर ने अपना नाम मोजिद अंसारी पिता मोहिब अंसारी ग्राम पंडरी थाना चान्हो बतलाया। वहीं उसने बताया कि वे लोग पत्थलगांव से गोवंशीय पशु को लोड कर रांची के नगड़ी ले जा रहे थे।
दिनांक – 21.09.2024 को समय 16.30 बजे सूचना मिली की एक बाईक पर सवार दो लड़का बुटी मोड़ से आगे किसी महिला का चैन छिन कर बरियातु की ओर भागा है। इस सूचना पर बिजली चौक के पास चेकिंग लगाया। इसी बीच बाईक पर सवार दो लड़का तेजी से आ रहा था, पुलिस को देखकर घुमकर भागने का प्रयास करने लगा लेकिन लड़के को पकड़ा गया। जिसके पास से एक चैन बरामद हुआ। पुछने पर कई बात झूठ बोलने लगा। चैन छीनने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में बरियातु थाना कांड सं0 304/2024, दि० 21.09.2024, धारा 304 (2)/307/3(5) BNS 2023. अंकित किया गया है। अनुसंधान जारी है।
अभियुक्त
(i) हिरा सोनार उर्फ हिरा लाल सोनार, उम्र 23 वर्ष पिता स्व० सुधीर सोनार पता- सितामी भंडारडीह, थाना – पिण्ड्राजोरा, जिला – बोकारो
दिनांक-22.09.2024 को समय करीब 00.45 बजे वरीय पुलिस अधीक्षक राँची के द्वारा सूचना मिली कि Mall of Ranchi के Lord of drinks Beer Bar में देर रात शराब सर्व किया जा रहा है तथा काफी तीव्र ध्वनी से साउण्ड बॉक्स बजाया जा रहा है। उक्त सूचना के सत्यापन एवं आवश्यक कार्यवाई हेतु पुलिस उपाधीक्षक कोतवाली के नेतृत्व में पु०नि० सह-थाना प्रभारी सुखदेवनगर थाना एवं गश्ती पदाधिकारी पु०अ०नि० नरेन्द्र कुमार शर्मा दल-बल के साथ वहाँ पहुँचे। तदोपरांत बार का निरीक्षण एवं सत्यापन के क्रम में पाया कि Lord of drinks Beer Bar में शराब परोसा जा रहा था तथा काफी तीव्र ध्वनी से साउण्ड बॉक्स बज रहा था और कुछ लोग डांस कर रहे थे। LOD के मैनेजर मनीष सिंह पुलिस को आते देखकर भागने का प्रयास कर रहे थे तभी भाग रहे LOD के मैनेजर मनीष सिंह उम्र 29 वर्ष, पिता श्री रवीन्द्र सिंह, सा० पराया, थाना जिला गया (बिहार) वर्तमान पता मदन ढाबा कोकर, थाना सदर, जिला राँची को विधिवत गिरफ्तार किया गया तथा LOD के मालिक गौरव अग्रवाल भागने में सफल रहें। जे०बी०एल० कंपनी का दो साउण्ड बॉक्स को विधिवत जप्त किया गया। इस संबंध मे सुखदेवनगर थाना कांड संख्या- 492/24, दिनांक-22.09.2024, धारा 223(a)/292 बी0एन0एस0 9 Bihar Control of the use of Loudspeaker Act 1955, एवं 5 Noise Pollution Act दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार प्राथमिकी अभियुक्त का नाम पता-
मनीष सिंह, उम्र 29 वर्ष, पिता श्री रवीन्द्र सिंह, सा० पराया, थाना जिला गया (बिहार) वर्तमान पता मदन ढाबा कोकर, थाना सदर, जिला राँची। चूँकि जमानतीय धारा में कांड पंजीकृत होने के कारण गिरफ्तार अभियुक्त को थाना से ही दो जमानतदारो के समक्ष विधिवत जमानत पर मुक्त किया गया।
काड में बरामद सामानों की सूची
जे०बी०एल० कंपनी का दो साउण्ड बॉक्स।
पैन ड्राईव (LOD) घटना के समय का।
छापामारी में शामिल पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मियों का नामः-
श्री प्रकाश सोय, पुलिस उपाधीक्षक, कोतवाली, राँची।
श्री मनोज कुमार, पु०नि० सह थाना प्रभारी, सुखदेवनगर थाना, राँची
पु०अ०नि० नरेन्द्र कुमार शर्मा, सुखदेवनगर थाना, राँची।
विवेकानंद विद्या मंदिर कुन्दरी, अपनी शिक्षा व्यवस्था के कारण अलग पहचान बना रही है। भारतीय संस्कृति और परम्परा के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जागरूकता का प्रयास कर रही है। विद्यालय के छात्रों को शिक्षा के साथ साथ जनसेवा के गुणों को भी सिखाने का प्रयास विद्यालय प्रबंधन कर रही है। छात्रों ने घूम घूम कर इस अभियान से जुड़ने का आह्वाहन भी लोगो से मिलकर करते हैं। इसी क्रम में दिनांक 21 सितंबर 2024 को विद्यालय परिसर में स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार के सहयोग से ब्लड ग्रुप जांच शिविर आयोजित किया गया। जहां पर विद्यालय के सभी छात्रों के साथ साथ आआज़ पास के आम नागरिकों का भी ब्लड ग्रुप जाँच किया गया एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई। ज्ञात हो कि आज ही विद्यालय के अर्धमासिक परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया गया जिसमें सत प्रतिशत छात्र सफल हुए। विवेकानंद विद्यालय के संचालक श्री कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि हमारा विद्यालय स्वामी विवेकानंद जी के आदर्श और विचार से चलता है। हमारा लक्ष्य है ग्रामीण क्षेत्रो में ज्यादा से ज्यादा सेवा देना है। बढ़ती हुई शिक्षा के व्यापारीकरण से सभी त्रस्त है, इस कारण हमारे विद्यालय में अच्छी और बेहतर शिक्षा सेवा उपलब्ध कराना है। हमने पाया की ग्रामीण क्षेत्रो में स्वयं और परिवार का ब्लड ग्रुप लोगो को पता नही है, इस समस्या को दूर करने का प्रयास लेस्लीगंज चिकिस्ता प्रभारी जी के पास हमने रखा और उनके सहयोग से आज सैकड़ो परिवार को अपना ब्लड ग्रुप की जानकारी उपलब्ध हो सकी, उनकी सभी टीम को धन्यवाद देता हूँ, आने वाले समय मे और भी कई प्रकार की सेवा विद्यालय प्रबंधन से मिलता रहेगा। शिविर में लेस्लीगंज के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजीव रंजन, नीलेश जी, प्रधानाध्यापक शुभम ठाकुर, शिक्षिका श्रेया, बबिता, गोल्डी, खुशी, ज्योति एवं सैकड़ो अभिभावकों की उपस्थिति रही।